मेरठ। कमिश्नरी में बृहस्पतिवार को आयोजित आयुक्त मित्र दिवस की अध्यक्षता करते हुए मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने मोदीनगर के पूर्व तहसीलदार (वर्तमान में तहसीलदार सदर गाजियाबाद) विजय शंकर मिश्र को लापरवाही बरतने पर प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए। वहीं, मेरठ के एक मामले में मंडलायुक्त ने कब्जा की गई जमीन शिकायतकर्ता को वापस दिलवायी।
आयुक्त मित्र दिवस के दौरान एनएच-58 से सटे ग्राम कादराबाद में करीब 6.5 बीघा जोहड़ (तालाब) की सरकारी भूमि को अमल दरामद कर खाली कराने का प्रकरण विचाराधीन था। जिसके शिकायतकर्ता कैलाश कॉलोनी मोदीनगर निवासी फिरेराम प्रजापति थे। इस संबंध में अपर आयुक्त न्यायालय ने 27 जुलाई 2017 को तहसीलदार मोदीनगर विजय शंकर मिश्र को अमल दरामद करने के निर्देश दिए थे। मंडलायुक्त ने पत्रावलियों का अवलोकन करते हुए पाया कि तत्कालीन तहसीलदार मोदीनगर ने न तो भूमि का अमल दरामद कराया और न ही भूमि खाली करायी। जबकि इसकी फाइल दबा दी गई। बाद में मंडलायुक्त के निर्देश पर एसडीएम मोदीनगर ने 25 जुलाई 2017 को उक्त भूमि को अमल दरामद किया। मंडलायुक्त ने प्रथम दृष्टया इसमें तत्कालीन तहसीलदार मोदीनगर की शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता व न्यायालय के आदेश की अवहेलना प्रतीत होना मानकर प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए।
दूसरा प्रकरण शिकायतकर्ता कैलाश चंद्र निवासी ग्राम लिसाड़ी थाना लिसाड़ी गेट का था। शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्थनापत्र में बताया गया कि उसके चचेरे भाई रूप सिंह ने अपनी 1440 वर्ग मीटर भूमि को ग्राम नूरनगर थाना ब्रह्मपुरी निवासी किरन पाल को बेचा था। शिकायतकर्ता को कुर्रों द्वारा 1850 वर्गमीटर की भूमि प्राप्त हुई थी जिसकी करीब 14 लाख कीमत की करीब 400 वर्ग मीटर जमीन पर किरन पाल ने अवैध कब्जा कर लिया। मंडलायुक्त ने एसडीएम सदर को मौके पर जाकर जांच कर आयुक्त मित्र दिवस पर उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान मंडलायुक्त ने शिकायतकर्ता को उसकी कब्जे की जमीन को वापस दिलवाया।
खास बात
- आयुक्त मित्र दिवस पर मंडलायुक्त ने सुनवाई के दौरान की कार्रवाई