अमर उजाला ब्यूरो
सरूरपुर। बजाज शुगर मिल किनौनी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन गोपालदास महाराज भजन और चौपाइयों के साथ राम सीता विवाह के वर्णन से पंडाल खुशी से विभोर हो गया। कथा प्रसंग का ऐसा अनूठा नजारा बन पड़ा मानों पूरा परिवेश राममय हो गया।
महाराज ने कहा कि ज्यादा जवाब वो देता है जो झूठा हो सकता है। सत्य को किसी सहायता की जरूरत नहीं होती हैं। सहारे की जरूरत कमजोर को होती है और यह जीवन का सीधा गणित है। अन्ध श्रद्धा और झूठी मान्यता के लिए भी स्वच्छता अभियान की जरूरत है। मुख से निकले वचन नहीं आते 21वीं सदी है इसलिए किसी को श्राप मत दो बल्कि उसे सावधान करो। श्राप देने जैसा तप हमारे अन्दर है ही नहीं। इसके लिए तपस्या चाहिए। श्राप क्रोध के बिना नहीं आता है। मुख से निकले वचन को कोई भी वापस नहीं ला सकता है। वे हमेशा ब्रह्माण्ड में घूमते रहते हैं। मानस कहता है कि रामराज के लिए चार मत साधू मत, लोक मत, राजनीतिक मत और सनातन मत आवश्यक है। कथा हर देश और हर काल में तथा हर परिस्थिति में होती है। भगवान राम की कथा हमें एकता के सूत्र में बांधती है। रामकथा के श्रवण से मन के राग, द्वेष, ईर्ष्या और भेदभाव समाप्त हो जाते हैं। यह मन को शांत कर हिंसक भावनाओं को रोकती है। भगवान श्रीराम व सीता माता के वनवास के दौरान कुटिया में रहने का उदाहरण देते हुए बताया कि एक महल की अपेक्षा एक कुटिया में जीवन यापन कई गुना शांतिपूर्ण होता है। रामकथा के पांचवें दिन राजकुमार टाया यजमान के रूप में रहे। इस मौके पर यूनिट हैड केपी सिंह, वीसी त्यागी, संजीव कुमार, अखिल कुमार, राजकुमार मिश्रा, पंडित दिनेश मणि त्रिपाठी, कौशिक मंडल आदि मौजूद रहे।