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मेरठ। सरकार परिषदीय स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों की तरह बनाने के दावे तो कर रही है, लेकिन धरातल पर हकीकत अलग है। शैक्षिक सत्र बीतने के चार माह बाद भी परिषदीय स्कूलों के बच्चों को ड्रेस तो दूर पाठ्य पुस्तकें नसीब नहीं हुई। नौ लाख के सापेक्ष चार लाख पुस्तकें ही अभी तक प्रकाशकों से मिली हैं, कई कक्षाओं की तो एक भी किताब अभी तक नहीं आई है।
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सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के बढ़ चढ़कर दावे हो रहे हैं। सरकार ने स्कूलों में ड्रेस बदली, बच्चों को जूते मौजे में आने को कहा जा रहा है, लेकिन किताबें अभी तक बच्चों को नही मिली। विभागीय जानकारी के अनुसार जनपद के परिषदीय स्कूलों के करीब सवा लाख बच्चों के लिए करीब 9 लाख पाठ्य पुस्तकों की जरूरत है। शासन द्वारा अधिकृत मथुरा, आगरा, लखनऊ और साहिबाबाद के कुल छह प्रकाशकों को किताबें सप्लाई करने के आर्डर दिए हैं, लेकिन अभी तक करीब पांच लाख किताबें ही यहां पहुंची हैं। कुल 51 तरह की पुस्तकें आनी हैं जिनमें से 28 तरह की पुस्तकें ही आई हैं।
ये फर्क है प्राइवेट और सरकारी स्कूल में
सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों में भी शैक्षिक सत्र अप्रैल से शुरू कर दिया है। प्राइवेट स्कूल में मार्च के आखिरी सप्ताह में नई क्लास की कापी किताबें बाजार से मिल गई हैं। बच्चे पहली अप्रैल से ही फुल ड्रेस में नई क्लास की किताबों के साथ स्कूल आ रहे हैं। उनके तिमाही टेस्ट भी हो चुके हैं, जबकि प्राथमिक स्कूलों में अभी तक बच्चों को किताबें ही नही मिली है। ड्रेस और जूते भी उपलब्ध नहीं हुए हैं।
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ये है स्कूल का हाल
अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि शहर में शारदा रोड स्थित कृष्णापुरी प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन कक्षा चार, पांच में गणित, कक्षा चार में संस्कृत और हमारा परिवेश विषय की किताब ही आई थी। बाकी सब्जेक्ट की किताबें आई ही नहीं थी जबकि कक्षा एक से तीन तक की एक भी किताब छात्रों को नहीं मिली है।

पुरानी किताबों से पढ़ा रहे
कृष्णापुरी नंबर एक की प्रधानाध्यापिका दीपमाला ने कहा कि उन्होंने कक्षा पास कर चुके बच्चों की पुरानी किताबें अगली क्लास में आए बच्चों को दिला दी हैं और उसी से उन्हें पढ़ाया जा रहा है। कोर्स समय पर पूरा हो जाएगा।
एक महीना भी लग सकता है
किताबों की सप्लाई जिले में आने के बाद पहले उनकी गुणवत्ता की जांच प्रशासन द्वारा तय कमेटी करेगी। इसके बाद इन किताबों को बीआरसी के माध्यम से स्कूलों तक भेजा जाता है। सप्लाई आने के बाद बच्चों तक पहुंचने में 15-20 दिन का समय लगता है। ऐसे में अगस्त के आखिर या 10 सितंबर तक ये किताबों बच्चों तक पहुंचेंगी।

जिले का हाल
प्रा. स्कूल 910
छात्र 1,19,210
शिक्षक जूनियर 1106
शिक्षक प्राइमरी 3246

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वर्जन...
जल्द आएंगी किताबें
शासन द्वारा अधिकृत प्रकाशकों को ही किताबें सप्लाई के आर्डर दिए गए हैं। किताबों की गुणवत्ता की जांच के बाद इन्हें स्कूलों में भेजा गया है। जल्द सप्लाई के लिए प्रकाशकों से कहा गया है। किताबें आते ही उनका जल्द सत्यापन कराकर स्कूलों में भेजा जाएगा। -सतेंद्र कुमार बीएसए, मेरठ
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