अब पार्किंग के साथ बनाएं चार मंजिला भवन
एमडीए ने दी अनुमति, नौ मीटर चौड़े मार्ग पर बनेंगी बहुमंजिला इमारतें
आवासीय कालोनियों के भीतर चार मंजिला इमारतों को मिलेगी हरी झंडी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
अब शहर में ढाई मंजिल नहीं, पूरे तीन और चार मंजिला फ्लैट बनाए जा सकेंगे, वह भी पार्किंग के साथ। मेरठ विकास प्राधिकरण ने बहु आवासीय इकाई योजनाओं को अनुमति दे दी है। अब आवासीय कालोनियों के भीतर इसी तरह के फ्लैट बनेंगे। इस नई योजना से खास तौर पर छोटे बिल्डरों को संजीवनी मिलेगी।
अभी तक बिना पार्किंग और पार्क के तीन मंजिला इमारतों को फ्लैट के लिए अनुमति नहीं मिलती थी। बिल्डरों ने इसकातोड़ निकाला। उन्होंने एफएआर (फ्लोर एरिया रेश्यो) को सेट करते हुए ढाई मंजिला इमारतों की मंजूरी लेनी शुरू कर दी। यहां एक रसोई पर ही एमडीए पूरी इमारत स्वीकृत करता था। अब इस नियम में बदलाव हो गया है। बहु आवासीय नीति में बदलाव करते हुए बोर्ड ने भी अनुमोदन किया है।
ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग
नए नियम के अनुसार पार्किंग के लिए ग्राउंड फ्लोर अनिवार्य किया गया है। न्यूनतम नौ मीटर चौड़े मार्ग पर ही इन नई इमारतों का मानचित्र स्वीकृत किया जाएगा। एक भवन की ऊंचाई अधिकतम 15 मीटर होगी। किसी भी भूखंड का क्षेत्रफल 150 से 300 मीटर होने की दशा में ग्राउंड फ्लोर के साथ तीन मंजिल तथा भूखंड का क्षेत्रफल तीन सौ मीटर से अधिक होेने पर ग्राउंड फ्लोर के साथ चार मंजिल भवन बनाए जा सकेंगे।
छोटे बिल्डरों को मिलेगी राहत
इस नई नीति से छोटे बिल्डरों को राहत मिलेगी। मल्टी स्टोरी ऊंची ऊंची इमारतें बनाने वाले बिल्डर तो नक्शा पास कराते थे पर दो या तीन मंजिला इमारतें बना रहे बिल्डर अनाधिकृत निर्माण की तरफ जा रहे थे। चूंकि अब आसानी से इस नियम में नक्शे पास होंगे तो यह उन बिल्डरों के लिए लाभकारी साबित होगा। उधर एमडीए को भी इससे भारी आय होगी।
नई कालोनियों पर निगाह
इस बाबत नई कालोनियों पर निगाह रखी जाएगी। चूंकि यहां पर ही नए ले आउट स्वीकृत होने हैं, तो यहां सबसे ज्यादा निर्माण होगा। एमडीए वीसी ने इस बाबत टीम बनाकर काम करने को कहा है। जो भी नए नक्शे आएं, उनका गहनता से अध्ययन करने को कहा है।
कंप्यूटर से मिलान करो
आवासों का मौके पर और एमडीए के रिकार्ड में क्या अंतर है, इसका आंकलन करने को कहा गया है। वीसी ने बृहस्पतिवार को इस बाबत बैठक ली। इसमें कहा कि जिन आवंटियों पर बकाया है, उनसे वसूली करें। यह भी देखें कि लोगों ने आवंटित कराते ही तो आवास नहीं बेच दिए। उनकी किश्तों का हिसाब निकालें। मेट खुद घर जाकर सभी को नोटिस दें। डाक से नोटिस केवल शहर से बाहर वालों को भेजें। उन्होंने कहा सबसे जरूरी है कि डेटा दुरुस्त हो। ताकि पूछते ही तत्काल किसी भी आवंटी के बारे में पूरी जानकारी सामने आ सके।
वर्जन
बहु आवासीय नीति से मकान बनाने को सहमति दी गई है। इसके अलावा हम अपने पुराने आवासों का डेटा भी तैयार कर रहे हैं। एक-एक आवास का सत्यापन होगा। जिस पर बकाया है, वसूली होगी। पैसा न देने पर आवंटन निरस्त होगा। -साहब सिंह, वीसी एमडीए