निगम में दिन भर विरोध, शाम को समझौता
मेरठ। नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष चुनाव और पुनरीक्षित बजट की बैठक को स्थगित करने के मामले पर तीन दिन तक निगम परिसर में चला पार्षदों का धरना समाप्त हो गया। अधिकारियों के मौजूदगी में हुए समझौते के तहत अब 21 को निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष का चुनाव होगा। वहीं 22 फरवरी को नौचंदी मेला समिति और 23 फरवरी को नगर निगम बजट कार्यकारिणी की बैठक होगी। इसके लिए महापौर ने भी नगरायुक्त को पत्र भेजकर सहमति जता दी है।
निगम में हुआ बुद्धि शुद्धि यज्ञ
नगर निगम में धरने पर बैठे बसपा व सपा पार्षदों ने शुक्रवार को निगम में जिस स्थान पर चिकन बिरयानी की दावत की, शनिवार को उसी स्थान पर यज्ञ किया। जिसको पार्षदों ने नगरायुक्त की बुद्धि शुद्धि यज्ञ का नाम दिया। साथ ही मुस्लिम पार्षदों ने दुआएं भी पढ़ी।
शाम को हुआ समझौता
अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी और लेखाधिकारी मनोज त्रिपाठी शनिवार शाम पांच बजे धरना स्थल पर पहुंचे और वार्ता की। महापौर सुनीता वर्मा और पार्षदों ने मान सम्मान की बात कही। हालांकि कुछ देर बाद पार्षदों ने धरने को खत्म करने का एलान कर दिया। साथ ही निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष का चुनाव कराने पर सहमति जताई।
ये था मामला
महापौर सुनीता वर्मा ने 15 फरवरी को नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष का चुनाव निश्चित किया था। साथ ही पुनरीक्षित बजट पर कार्यकारिणी की बैठक बुलाई थी। जिसपर भाजपा पार्षदों ने पत्र व्यवहार में त्रुटियां दर्शाकर चुनाव और बैठक को स्थगित करने की मांग की थी। नगरायुक्त ने भाजपा पार्षदों की शिकायत पर चुनाव स्थगित कर दिया था। इसपर बसपा व सपा पार्षदों ने विरोध करते हुए नगर निगम में धरना शुरू कर दिया।
भाजपा पार्षदों ने की कार्रवाई की मांग
भाजपा महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग के नेतृत्व में ललित नागदेव, विपिन जिंदल आदि पार्षद अपर आयुक्त से मिलने पहुंचे। उन्होंने शिकायत करते हुए कहा कि जिस प्रकार से नगर निगम परिसर में पार्षद और बाहरी लोगों ने बिरयानी की दावत की। उससे भाजपा पार्षद नाराज थे। जहां भाजपाइयों ने पूरे प्रकरण से पार्टी हाईकमान और उप्र सरकार को अवगत कराया है। वहीं कमिश्नर, डीएम और नगरायुक्त से जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
गलती मान ली
निगम अधिकारियों ने निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष चुनाव और बजट बैठक स्थगित करने पर अपनी गलती मानी है। इसपर सभी पार्षदों ने मान सम्मान के साथ धरना समाप्त कर दिया है। सुनीता वर्मा, महापौर।
विकास पर ध्यान दें महापौर
महापौर को शहर के विकास पर काम करना चाहिए। जो निगम में हो रहा है, यह दुर्भाग्य पूर्ण है। चुनाव और बजट की बैठक एक साथ हो ही नहीं सकती थी। जितनी गलती निगम अधिकारियों की है उतनी ही गलती महापौर की भी है। निगम एक्ट से हटकर निगम को चलाया जाना संभव नहीं है। अजय गुप्ता, पूर्व पार्षद भाजपा
निगम के पास 100 करोड़
महापौर की यह सारी लड़ाई विकास के लिए ही है, जबकि निगम प्रशासन गलत रवैया अपना रहा है। वित्तीय वर्ष पूरा होने में समय कम है और निगम के पास लगभग सौ करोड़ रुपये हैं। यदि समय रहते इस रकम को विकास कार्य पर खर्च नहीं किया तो यह लैप्स हो जाएगा। यह जनता के साथ बड़ा छल होगा> शाहजहां सैफी बसपा नेता