पहचान पत्र है तो ही लगेंगे एंटी रेबीज इंजेक्शन
मेरठ। जिला अस्पताल की ओपीडी में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है। पहले जहां 60-70 मरीज आ रहे थे, वहां अब इनकी तादाद 100-125 केभी पार पहुंच रही है। खास बात ये है कि इंजेक्शन लगवाने के लिए पहचान पत्र दिखाना और मोबाइल नंबर बताना जरूरी है। अगर पहचान पत्र नहीं होगा तो इंजेक्शन नहीं लगेगा। हालांकि मोबाइल नंबर अपने परिवार केकिसी सदस्य या पड़ोसी का भी बता सकते हैं।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि पिछले 15 दिन से एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वाले फिर बढ़ गए हैं। काउंसिलिंग कर इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं, साथ ही एंटी रेबीज वैक्सीन रूम (एआरवी) में ग्रामीण क्षेत्रों से आए रोगियों को अपने क्षेत्र में स्थापित चिकित्सा केंद्र पर ही वैक्सीन लगवाने के लिए कहा जा रहा है। वहीं जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पीकेबंसल का कहना है कि कोशिश रहती है कि अधिकांश लोगों को इंजेक्शन लगा दिए जाएं। देहात के मरीजों के लिए सीएचसी और पीएचसी पर इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
कैसे होता है रेबीज
कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रेबीज नामक बीमारी होने का खतरा रहता है। रेबीज सीधे रोगी के मानसिक संतुुलन को खराब कर देता है, जिससे रोगी का अपने दिमाग पर कोई संतुलन नहीं रहता है।
पांच इंजेक्शन लगते हैं
रेबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवां 28 दिन के बाद लगाया जाता है।
कुत्ता जिंदा है तो इंजेक्शन की जरूरत नहीं
जिला अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने आए लोगों से पहले पूछा जाता है कि जिस कुत्ते ने उन्हें काटा है, वह जिंदा है या नहीं। अगर यह कहा जाता है कि कुत्ता जिंदा है तो उसे इंजेक्शन नहीं लगाया जाता। इसे लेकर कई बार एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) रूम में मरीजों और डॉक्टरों के बीच कहासुनी भी होती है।