मेरठ। आरजी पीजी कॉलेज में शनिवार को हुए छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सभी पांचों पदों पर कब्जा कर लिया। यहां 10 प्रत्याशी मैदान में थे। एक पैनल एबीवीपी और दूसरा समाजवादी छात्र सभा, एनएसयूआई एवं रालोद के संयुक्त गठबंधन का था। दोनों पैनलों में बराबर का मुकाबला हुआ।
केवल 810 मतों से चुनाव
एबीवीपी के पैनल ने जीत दर्ज कराते हुए कॉलेज में अपना तीन साल का वनवास तोड़ा और शानदार वापसी की है। सुबह 10 बजे से मतदान प्रारंभ होकर दोपहर 2 बजे तक चला। 10 बूथों पर 4750 मतदाताओं में से कुल 810 छात्राओं ने ही वोट डाले। मतगणना के बाद परिणाम घोषणा हुई। विजेता प्रत्याशियों को कॉलेज प्रिंसिपल स्नेह गुप्ता ने शपथ ग्रहण कराकर जीत का प्रमाणपत्र प्रदान किया।
बाहर नारेबाजी, अंदर शांति
कॉलेज के अंदर-बाहर भारी पुलिस फोर्स तैनात रहा। बाहर समर्थक चुनावी नारे लगाते रहे। चुनाव की वीडियो रिकार्डिंग हुई। कॉलेज के अंदर शांतिपूर्वक मतदान हुआ। नतीजे घोषित होने के बाद विजेता दल के समर्थकों ने कॉलेज गेट के बाहर खूब हंगामा किया।
निर्दलीय का कब्जा तोड़ा
शहर के मुख्य गर्ल्स कॉलेज आरजी पीजी में लगातार तीन वर्षों बाद अब पुन: एबीवीपी की वापसी हुई है। यहां निर्दलीय पैनल ही जीत दर्ज कराता आ रहा था। यहां 2011 में एबीवीपी का पूरा पैनल जीता था। 2012 में निर्दलीय प्रत्याशी भारती सोम अध्यक्ष चुनी गई और पैनल जीता। 2013 में भारती ने एबीवीपी के साथ मिलकर अपना पैनल उतारा और एबीवीपी को तीन पद मिले। 2013 के बाद लगातार एबीवीपी हारी। अब 2017 में एबीवीपी ने सभी पद कब्जा लिए। बड़े नेताओं के दूरी बनाने के बाद भी कॉलेज में एबीवीपी क ी जीत हुई।
छात्राओं ने किया प्रदर्शन, हंगामा
नामांकन से लेकर चुनाव प्रचार और मतदान के दिन तक कॉलेज में छात्राओं ने पूरा जोश दिखाया। मतदान के दिन सुबह 9 बजे से प्रत्याशी व समर्थक छात्राएं कॉलेज गेट के बाहर जमा हो गईं। पुलिस बैरीकेडिंग और फोर्स तैनात होने के बाद भी छात्राओं ने खूब नारे लगाए, जुलूस निकालकर मतदाताओं से वोट की अपील की। मतदान खत्म होने तक छात्राएं टोपी और दुपट्टे पहनकर हाथ में तख्ती लेकर जुलूस निकालतीं, वोट मांगती नजर आईं। कॉलेज में 24 दिसंबर से अवकाश हो रहा है इसलिए कई हॉस्टलर छात्राएं मतदान के बाद घर चली गईं।
ये रहा चुनाव परिणाम
अध्यक्ष : डॉली चौधरी- 484 --- धैर्य गिल - 315
उपाध्यक्ष : ज्योति गर्ग- 466 --- पारुल त्यागी - 333
सचिव: विजेता धामा- 474--- डॉली कुमार- 322
संयुक्त सचिव: सुनैना रानी- 458--- शैली- 340
कोषाध्यक्ष: शिवांशी कुशवाहा- 465--- वंशिका चहल - 334
क्या कहा जीत के बाद:
01: एंबुलेंस और आरओ की व्यवस्था कराऊंगी
अध्यक्ष पद जीतने वाली डॉली चौधरी कहती हैं कि कॉलेज में एंबुलेंस और आरओ की सुविधाएं दिलाना प्राथमिकता है। पिता नत्थू सिंह यूपी पुलिस में हैं, मम्मी शर्मिष्ठा देवी गृहिणी हैं। बीए प्रथम की छात्रा डॉली फलावदा से प्रतिदिन कॉलेज आती हैं। सपना शिक्षिका बनकर ज्ञान की रोशनी फैलाना है। वे कहती हैं कि परिवार के सपोर्ट, सहयोग से ही मैं यह चुनाव जीत पाई हूं। कॉलेज में प्रवेश लेते वक्त ही सोच लिया था कि छात्रसंघ चुनाव लड़ना है।
02: राजनीति नहीं वकालत है सपना
उपाध्यक्ष पद पर जीतीं ज्योति गर्ग वकील बनना चाहती हैं। बीकॉम प्रथम की छात्रा ज्योति के पिता कांति प्रसाद गुप्ता स्वयं वकील हैं। परिवार बेगमपुल में रहता है। मम्मी रजनी गुप्ता गृहिणी हैं। ज्योति कहती हैं कि कॉलेज में छात्राओं की छात्रवृत्ति से जुड़ी कई परेशानियां होती हैं। उन परेशानियों को दूर करना प्राथमिकता है। मेरे दोस्तों ने मुझ पर भरोसा किया तभी मेरी जीत हो पाई। परिवार ने भी पूरा साथ दिया। अब मन लगाकर इस पद की जिम्मेदारियों को निभाऊंगी।
03: भविष्य में राजनीति ही मेरा करियर
महामंत्री पद पर कब्जा करने वाली विजेता धामा कहती हैं कि अच्छा नेता बनकर देश सेवा करना चाहती हूं। गंगानगर निवासी विजेता के पिता सोहनवीर सिंह सरकारी नौकरी में हैं। मम्मी अनीता सिंह गृहिणी हैं। परिवार में विजेता पहली सदस्य हैं जो राजनीति में आई हैं। बीएससी प्रथम की छात्रा विजेता अपना भविष्य राजनीति में ही देखती हैं, इसकी शुरूआत कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव से की है।
04: खत्म हो जातिगत राजनीति
संयुक्त सचिव सुनैना रानी कहती हैं कि कॉलेज में सफाई की बड़ी समस्या हैं, हॉस्टलर को भी कई परेशानियां हैं उन्हें दूर करना ही प्राथमिकता है। इंचौली निवासी सुनैना के पिता हुकूम सिंह दिल्ली में बैंक मैनेजर हैं। मम्मी कौशल देवी गृहिणी हैं। परिवार से कोई भी राजनीति में नहीं हैं। सुनैना का सपना प्रशासनिक अधिकारी बनना है। बीए फाइनल की छात्रा सुनैना सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही हैं। कहती हैं कि देश से जातीय राजनीति को खत्म होना चाहिए। धर्म, वर्ग के नाम पर किसी नेता को चुनना एकदम गलत है। मम्मी-पापा के सहयोग से ही मैं यह चुनाव जीत पाई हूं।
05: शिक्षिका बनकर करनी समाजसेवा
कोषाध्यक्ष बनी शिवांशी कहती हैं कि छात्रसंघ का चुनाव शौक में लड़ा है, भविष्य में राजनीति में जाने का फिलहाल कोई इरादा नहीं हैं। शिवांशी शिक्षिका बनकर देश व समाज की सेवा करना चाहती हैं। गंगानगर निवासी शिवांशी के पिता सुभाष चंद मौर्य एफएसओ हैं। मम्मी मीरा देवी गृहिणी हैं। बीए प्रथम की छात्रा शिवांशी कहती हैं कॉलेज में गंदगी बड़ी समस्या है, इसकी वजह से छात्राओं की तबियत भी खराब हो जाती है। सफाई कराना ही प्राथमिकता होगी।