मेरठ। शब्दों को बोलने की कला से ही हमारा व्यवहार तय होता है। दैनिक जीवन में बोले जाने वाले छोटे-छोटे वाक्य ही हमारे व्यावहारिक स्तर को तय करते हैं। यह बातें मेरठ कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग में सुभाषी फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘सकारात्मक शब्दों से बनता है अच्छा व्यवहार’ विषय पर कार्यक्रम में अमित गुप्ता ने कही।
उन्होंने अलग-अलग उदाहरण देकर छात्रों को बड़े ही साधारण तरीके से बताया कि शब्दों से हमारा व्यवहार और सोच कैसे परिवर्तित होती है। उन्होंने बताया कि अपने शब्द या वाक्य बोलने से पहले सोचना बेहद जरूरी है। सकारात्मक शब्द युक्त भाषा बोलने से हमारे आसपास भी सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है, जिससे हमारा जीवन भी सुखमय हो जाता है। विभाग प्रमुख डॉ. इजरायल मियां ने बताय कि इंसान जन्म के दो साल बाद बोलना सीख जाता है। लेकिन बोलना क्या है यह सीखने में पूरा जन्म लग जाता है। अच्छी सोच के लिए अच्छी भाषा बेहद जरूरी है। इसकी शुरुआत आज से ही कर देनी चाहिए। कहा कि इस दिशा में चल रहा सुभाषी फाउंडेशन का कार्य सराहनीय कदम है। नेहा गुप्ता, चेतना अग्रवाल ने सभी का स्वागत किया। मंच का संचालन शिक्षिका डॉ. मंजू खोखर ने किया।