मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में उत्तर पुस्तिका देखने के लिए एक से डेढ़ महीने की वेटिंग है। आप आज उत्तर पुस्तिका देखने की अर्जी लगाते हैं तो सितंबर में नंबर आएगा। लंबी फेहरिस्त को खत्म करने में विवि की व्यवस्था लगी है, लेकिन रोजाना 100 से अधिक आ रहे प्रार्थना पत्र वेटिंग को खत्म नहीं होने दे रहे। इतनी अधिक संख्या में आरटीआई का आना मूल्यांकन व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। मुख्य परीक्षा 2017 में सबसे ज्यादा आरटीआई बीएससी फर्स्ट ईयर के छात्रों ने लगाई हैं।
सीसीएसयू ने जब से रिजल्ट की घोषणा शुरू की है, तब से आरटीआई आनी शुरू हो गईं। पुनर्मूल्यांकन का नियम नहीं है। छात्र-छात्राएं आरटीआई (सूचना का अधिकार अधिनियम 2005) के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका देख सकते हैं। इसमें छात्र दो तथ्यों की जांच कर सकते हैं। एक तो सभी सवाल चेक हुए हैं या नहीं। दूसरा प्राप्तांक के जोड़ में गलती तो नहीं है। कभी-कभी यह चूक हो जाती है। मूल्यांकन से असंतुष्ट छात्र आरटीआई डालते हैं। विवि की आरटीआई सेल इन दिनों काफी व्यस्त है।
बीएससी फर्स्ट ईयर में सबसे ज्यादा फेल
मुख्य परीक्षा 2017 के रिजल्ट में सबसे ज्यादा फेल होने के मामले बीएससी फर्स्ट ईयर में सामने आए हैं। इसमें बायो और मैथ ग्रुप शामिल है। मेरठ और सहारनपुर मंडल के कई कॉलेजों ने विवि में आकर हंगामा किया। अधिकारियों से जांच की मांग की। इस काम के लिए कमेटी गठित की गई। अभी उसकी रिपोर्ट नहीं आई है। कमेटी कुछ कॉपियों को चेक कर अपनी रिपोर्ट कुलपति को देगी।
कॉपी की दी जा रही फोटोकॉपी
उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी देने की व्यवस्था विवि ने लागू कर दी है। केंद्रीय सूचना आयोग के निर्देश को लागू कर दिया गया है। छात्रों को मांगने पर फोटोकॉपी एक रुपये प्रति पेज के हिसाब से दी जा रही है। खराब मूल्यांकन करने वालों शिक्षकों को इससे दिक्कत हो सकती है। कुछ छात्र कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
एलएलबी में शिकायत
एलएलबी के कई छात्रों ने मूल्यांकन पर सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है होनहार छात्रों को कम नंबर मिले हैं। टॉपर पिछड़ गए हैं। उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी लेने के बाद उन्होंने विशेषज्ञों से मशविरा किया है।
खास बात
- दो महीने में कॉपियां देखने के लिए सीसीएसयू में पांच हजार से अधिक आरटीआई पहुंचीं
- मूल्यांकन से खफा छात्र-छात्राएं लगा रहे आरटीआई, बीएससी फर्स्ट ईयर में सबसे अधिक