मेरठ। कोतवाल धनसिंह गुर्जर पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय में एक वर्ष का प्रशिक्षण पूरा होने पर सोमवार को पुलिस महकमे को 113 पुरुष और महिला प्रशिक्षु दरोगा मिल गए। इनमें 87 मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पाने वाले थे। 17 महिलाओं को इस कोटे से नौकरी मिली है। 6 पुरुष और 3 महिलाओं की सीधी भर्ती हुई है। परेड के बाद जब उनके कंधों पर सितारे लगाए तो खोए हुए अपनों को याद कर परिजनों की आंखें नम हो गईं।
पीटीएस के परेड ग्राउंड में सुबह नौ बजे दीक्षांत परेड की शुरुआत हुई। परेड ग्राउंड को फूल, गुब्बारों और रंगोली से सजाया गया था। फूलों से सजी जिप्सी में मुख्य अतिथि एडीजी भानु भास्कर ने परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली। इसके बाद प्रशिक्षु दरोगाओं की टुकड़ियां मार्च पास्ट करते हुए निकलीं। दर्शक दीर्घा के निकट पहुंचते ही लोगों ने ताली बजाकर उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। सभी प्रशिक्षु दरोगाओं जोश देखते ही बन रहा था। उन्हें खाकी वर्दी पहने देख परिजन भी खुशी से झूम रहे थे। इस मौके पर एडीजी ने कहा कि इन 113 दरोगाओं के शामिल होने से महकमा और ज्यादा मजबूत होगा।
एडीजी ने अपने संबोधन में प्रशिक्षु दरोगाओं को ईमानदारी और मेहनत के साथ ड्यूटी करने का आह्वान किया। प्रधानाचार्य/डीआईजी सतेंद्र कुमार सिंह ने दरोगाओं को संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई। इस मौके पर एएसपी डॉ. विभा सिंह, एएसपी दीपिका अग्निहोत्री, सैन्य सहायक जगदीश कालीरमन, संस्था मेजर वीरपाल सिंह, सूबेदार मेजर रामकिशन आदि मौजूद रहे।
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पति की मौत से उबरकर गीता ने पहनी खाकी
दिल्ली की रहने वाली गीता कसाना को पति अजित सिंह की मृत्यु जिंदगीभर का गम दे गई। बेटा परमजीत और बेटी कुहू की जिम्मेदारी गीता के कंधों पर आ गई। बच्चों की परवरिश के लिए आखिर गीता ने पति की मौत से उबरकर घर की चौखट लांघकर खाकी पहनने का निर्णय लिया। सोमवार को पासिंग आउट परेड के बाद बच्चों और परिजनों के साथ गीता काफी खुश थी। इस दौरान बार-बार पति की याद आने पर वे नम हुई आंखें छिपाती रहीं। इन्हें पहली तैनाती मेरठ में मिली है।
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बच्चों का भविष्य देख सूख गए आंसू
बुलंदशहर की निवासी सीता यादव दो बेटे तपेश और अर्नव की मां हैं। पुलिस महकमे में तैनात पति मोनू की मौत के बाद जैसे उन पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। दोनों बच्चे काफी छोटे थे। उनके भविष्य के लिए सीता ने अपने आंसू छिपाकर खाकी पहनने का फैसला लिया। इस दौरान सास मुनेश देवी का उन्हें पूरा सहयोग मिला। बच्चों से दूर रहकर कड़ी मेहनत करते हुए एक वर्ष की ट्रेनिंग पूरी की। पहली तैनाती उन्हें गाजियाबाद कमिश्नरेट मिली है।
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ड्यूटी के दौरान पिता हुए थे बलिदान, अब बेटे ने पहनी वर्दी
मेरठ निवासी दरोगा शिवकुमार नागर मुरादाबाद जनपद के पाकबड़ा थाने की ग्रोथ चौकी इंचार्ज थे। 9 जुलाई 2017 की निजी कार से गस्त कर रहे थे। तभी संरक्षित पशुओं की तस्करी करने वालों को रोकने के लिए उन्होंने अपनी गाड़ी उनके ट्रक के आगे लगा दी थी। ट्रक चालक ने उनकी गाड़ी में जोरदार टक्कर मार दी थी। इससे शिवकुमार नागर और सिपाही रविकांत की मौके पर ही मौत हो गई थी। कार में ही सवार असमोली निवासी शमीम की भी मौत हो गई थी। पाकबड़ा निवासी हाजी आलिम गंभीर रूप से घायल हो गया था। सोमवार को दीक्षांत परेड में पिता के बाद नौमित नागर को वर्दी में देख परिजन अपने आंसू रोक नहीं पाए। उन्हें बरेली में पहली तैनाती मिली है।
एक प्रशिक्षु 90 दिन से ज्यादा छुट्टी लेने पर वापस भेजा
प्रशिक्षण विद्यालय में 114 लोगों ने एक वर्ष पूर्व आमद दर्ज कराई थी। इनमें युवराज सिंह नाम के प्रशिक्षु ने प्रशिक्षण के बीच 90 दिन से ज्यादा का अवकाश ले लिया। नियमों के तहत उन्हें इतने दिन के अवकाश के बाद प्रशिक्षण में शामिल नहीं किया जा सकता। ऐसे में उन्हें प्रशिक्षण पूरा किए बिना ही वापस भेज दिया गया।
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एक वर्ष में ये दिया गया प्रशिक्षण
एक वर्ष में प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को शस्त्र प्रशिक्षण, फील्ड क्राफ्ट, घुड़सवारी, तैराकी, कमांडो फोर्स का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा उन्होंने पुलिस कार्य से संबंधित भारतीय न्याय संहिता, भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, साक्ष्य अधिनियम, पुलिस विज्ञान, भीड़ नियंत्रण और साइबर क्राइम व कंप्यूटर का ज्ञान प्राप्त किया। नए कानूनों की जानकारी विभिन्न प्रसिद्ध प्रवक्ताओं ने दी।
वाराणसी के योगेंद्र पांडेय को सर्वांग सर्वोत्तम प्रशिक्षु का अवार्ड
दीक्षांत परेड के बाद उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को पुरस्कृत भी किया गया। वाराणसी के योगेंद्र पांडेय को सर्वांग सर्वोत्तम प्रशिक्षु का अवार्ड मिला। आउटडोर परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर भी उन्हें सम्मानित किया गया। सुमित पांडेय को इनडोर परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर पुरस्कार मिला। परेड के प्रथम कमांडर मनीष शर्मा, द्वितीय कमांडर मयंक प्रताप सिंह, तृतीय कमांडर योगेंद्र पांडेय और महिला टोली कमांडर सालनी भारती को उच्च प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।