समाधान योजना का दायरा बढ़ा, रिवर्स चार्ज और पंजीकरण में भी बदलाव
मेरठ। जीएसटी की पेचीदगियों से परेशान व्यापारियों के राहत की खबर है। पिछले दिनों किए गए जीएसटी अधिनियम में संशोधन लागू कर दिए गए हैं। इससे जनपद केहजारों व्यापारियों को लाभ मिलेगा।
वाणिज्य कर विभाग केअधिकारियों का दावा है कि जीएसटी अधिनियम में किए गए संशोधन के तहत व्यापारियों की रिवर्स चार्ज, समाधान योजना और जॉब वर्क जैसी समस्याओं का इन संसाधनों से बहुत हद तक समाधान हो जाएगा।
अभी तक रिवर्स चार्ज के तहत जूते और हस्तशिल्प आदि के व्यापारियों को पंजीकृत खरीद और खर्च पर नगद जीएसटी भरना होता था, लेकिन अब यह सिर्फ अधिकृत पंजीकृत व्यक्तियों और वस्तुओं पर ही लागू होगा। वहीं, समाधान योजना का विकल्प एक करोड़ रुपये तक वार्षिक टर्नओवर वाले ट्रेडर, निर्माता व रेस्टोरेंट के लिए है। इसकी सीमा डेढ़ करोड़ रुपये कर दी गई है।
वाणिज्य कर के डिप्टी कमिश्नर अजय श्रीवास्तव ने बताया कि इसमें सैकड़ों छोटे व्यापारी समाधान योजना का विकल्प अपनाने योग्य हो जाएंगे। साथ ही समाधान योजना के व्यापारी अपने कुल वार्षिक टर्नओवर के 10 प्रतिशत तक सेवाएं दे सकते हैं। इसके अलावा पंजीकरण में बदलाव किया गया है। इसके तहत अभी तक प्रदेश में किसी व्यापारी के एक से अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं तो उनका अलग अलग पंजीकरण किया जा सकता है। अभी तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
14 दिन छुड़ाया जा सकेगा माल
13 सवारी से अधिक की मोटरगाड़ी की खरीद तथा उसके बीमा, सर्विसिंग, रिपेयर, मेटिनेंस पर अब आईटीसी मिलेगी। सचल दल इकाई द्वारा पकड़े जाने पर अब 14 दिन तक माल छुड़ाया जा सकता है। अभी यह समय सीमा सात दिन थी।
अस्थायी रूप से सस्पेंड होगा जीएसटी नंबर
वाणिज्य कर के एडिशनल कमिश्नर वीएन सिन्हा ने बताया कि व्यापारी द्वारा पंजीयन रद्द करने पर अधिकारी द्वारा जीएसटी नंबर स्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया जाएगा ताकि रिटर्न जमा नहीं करना पड़े। अभी तक फर्म बंदी की सूचना देने पर भी रिटर्न आदि को औपचारिकताएं पूरी करनी होती थीं। लेट फीस लगती थी। संशोधित नियमों में एक डेबिट नोट/ क्रेडिट नोट को कई बिलों केसंबंध में कंसोलिडेट बनाया जा सकता है। अभी तक यह सिर्फ एक बिल में भी बनाया जा सकता था।