मुनाफे के फेर में अर्थशास्त्र का कायदा भी गौण
शामली। बाजार और अर्थशास्त्र का कायदा कहता है कि किसी कोई वस्तु बाजार में सस्ती पहुंचती है तो ग्राहक को भी वह सस्ती ही मिलती है, लेकिन दूध के मामले में ऐसा नहीं हो रहा है। पिछले साल के मुकाबले डेयरियां पांच-छह रुपये प्रति लीटर कम पर दूध खरीद कर रही हैं, उपभोक्ताओं को बेचे जाने वाली दूध की कीमतों में कोई कमी नहीं की गई है। उल्टे दो से तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। पशुपालकों का भी शोषण हो रहा है, साथ ही ग्राहकों को भी इसका कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है।
गांव मछरौली निवासी सुनील कुमार और सुभाष चौधरी पशु पालक हैं और मदर डेयरी को दूध सप्लाई करते हैं। उन्होंने बताया कि 65 फैट वाला दूध पिछले साल 42 रुपये प्रति लीटर तक सप्लाई हो रहा था, लेकिन अब कंपनी 36 रुपये तक खरीद रही है। कुडाना निवासी पशु पालक राजकुमार का कहना है कि 100 फैट वाला दूध पिछले साल 68 रुपये तक खरीदा जा रहा था, लेकिन इस बार 62 रुपये ही कंपनी खरीद रही है। इसी गांव के डेयरी संचालक कोसिंद्र का कहना है कि वह मदर डेयरी और मधूसूदन कंपनी को दूध सप्लाई करते हैं। 65 फैट वाला दूध पिछले साल 42 रुपये प्रति लीटर लिया जा रहा था, जबकि इस बार 38 रुपये लिया जा रहा है।
बाजार में बढ़े दूध के दाम
मौजूदा समय में बाजार में दूध का दाम पिछले साल के मुकाबले करीब दो रुपये बढ़ा हुआ है। फुल क्रीम दूध 52 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि पिछले साल 50 रुपये प्रति लीटर था। वहीं, टोंड मिल्क 42 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि पिछले साल 40 रुपये प्रति लीटर था। इसके अलावा शहर में दूध बेचने वाले डेयरी संचालक भैंस और गाय का मिश्रित दूध 45 रुपये लीटर बेच रहे हैं, जबकि पिछले साल 42 रुपये प्रति लीटर था।