मेरठ। एनजीटी से रियायत मिलने के बाद पिछले दो साल से शहर में प्रतिबंधित डीजल बस चला रहे स्कूलों पर शिकंजा कस गया है। अब ऐसे सभी स्कूलों को अपनी दस साल पुरानी बसें तीन महीने के अंदर सीएनजी में कंवर्ट करानी होंगी। इस संबंध में आरटीओ ने सभी स्कूलों को आदेश दे दिए हैं। तीन महीने बाद जो भी डीजल से संचालित स्कूल बस सड़क पर मिलेगी तो उसे सीज कर दिया जाएगा।
एनजीटी ने अप्रैल 2015 को दिल्ली समेत एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल व 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों का संचालन प्रतिबंधित कर दिया था। दस साल पुरानी डीजल स्कूल बसों को सीएनजी में कंवर्ट कराकर चलाने के निर्देश दिए थे। इस पर शहर के स्कूल संचालकों ने शहर में सीएनजी के पर्याप्त स्टेशन नहीं होने की जानकारी देते हुए एनजीटी से सीएनजी स्टेशन लगने तक संचालन में छूट देने की अपील की थी। इस पर एनजीटी ने स्कूल संचालकों को सीएनजी स्टेशन की व्यवस्था होने तक छूट प्रदान कर दी थी। आरटीओ डॉ. विजय कुमार ने बताया कि उनकी गेल अधिकारियों से शहर में सीएनजी की आपूर्ति को लेकर बात हुई थी। उन्होंने बताया कि अब शहर में पर्याप्त मात्रा में सीएनजी की उपलब्धता है। स्कूल बसों को सीएनजी की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। शहर में 100 से ज्यादा स्कूल बस 10 साल से पुरानी हैं। इन सभी स्कूलों को तीन महीने के अंदर दस साल पुरानी डीजल बसों को सीएनजी में कंवर्ट कराने का नोटिस जारी कर दिया है।