- 20 करोड़ रुपये से ज्यादा समायोजन शुल्क तक कर दिया माफ
- समायोजन के नाम पर दे दी व्यावसायिक जमीन, एमडीए अधिकारियों की कारस्तानी
- न बेटरमेंट शुल्क वसूला, न विकास शुल्क, किए करोड़ों के वारे न्यारे
- आयुक्त स्तर पर होगी जांच, शिकायत के बाद खुल रही पोल
अमित मुदगल
मेरठ। मेरठ विकास प्राधिकरण ने दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की जमीन के समायोजन में खेल कर डाला। सारे नियमों को ताक पर रखकर व्यावसायिक जमीन का समायोजन किया। अधिकारियों ने इस कदर एमडीए को चूना लगाया कि समायोजन शुल्क समेत करोड़ों रुपये के अन्य शुल्क तक नहीं वसूले। शिकायत पर आयुक्त स्तर से पूरे प्रकरण पर जांच शुरू हो गई है।
एमडीए में जमीनों के दाम आसमान पर हैं। डिफेंस एन्क्लेव, पल्लवपुरम तथा गंगानगर रक्षापुरम शताब्दीनगर योजना, स्पोर्ट्स गुड्स कॉम्प्लेक्स आदि योजनाओं में दाम महंगे होते जा रहे हैं। इन्हीं योजनाओं में सबसे ज्यादा जमीनों का समायोजन हुआ।
2.20 लाख वर्ग मीटर जमीन का समायोजन
इन योजनाओं में एक दो वर्ग मीटर नहीं, दो लाख बीस हजार वर्ग मीटर जमीन का सत्यापन हुआ। केवल शताब्दीनगर में ही एक लाख 53 हजार वर्ग मीटर जमीन को समायोजित किया गया। व्यावसायिक जमीन के खेल में सबसे ज्यादा खेल किया गया।
यह है समायोजन
एमडीए की योजना में जब जमीन का अधिग्रहण होता है तो जमीन का समायोजन किया जा सकता है। यह उस स्थिति में होता है, जब अधिग्रहीत जमीन में किसी का मकान, संस्थान आदि आ जाता है। ऐसे में प्रार्थी अपनी जमीन को समायोजित करने की मांग करता है। नियमानुसार आवासीय जमीन का समायोजन होता है जिसमें एमडीए इतनी ही जमीन बदले में उस व्यक्ति को दे देता है।
यूं लिखी घोटाले की पटकथा
एमडीए अधिकारियों ने समायोजन में खुलकर खेल खेला। खेल यह हुआ कि आवेदक की जमीन को वहीं समायोजित दिखा दिया गया जहां उसकी जमीन मौके पर थी। विषम परिस्थितियों में ही ऐसा किया जा सकता है। लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। अधिकतर मामलों में समायोजन हुआ वह भी मौके पर ही। योजनाओं के फ्रंट पर लाखों वर्ग मीटर जमीन दे दी गई। समायोजन करने वालों ने उसी जमीन पर कॉमर्शियल भवन बना डाले। उद्देश्य था कि आवास बनेंगे। लेकिन लोगों ने इस जमीन को अपने पक्ष में लेकर मार्केट तक बना डाली।
इस जमीन के दाम आसमान पर
वैसे तो इस जमीन के दाम बीस हजार रुपये के भी पार हैं। लेकिन यदि समायोजन समय की जमीन का हिसाब दस हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर से भी लगाया जाए तो यह जमीन करीब दो अरब बीस करोड़ रुपये की बनती है।
शुल्क तक कर दिया माफ
जमीन तो दी ही। लेकिन एमडीए ने इस कदर गड़बड़झाला किया कि शुल्क वसूली तक नहीं की। नियमानुसार जिस जमीन का समायोजन होता है, उसका उसी दिन का सर्किल रेट और समायोजन के दिन के सर्किल रेट के अंतर का 33 प्रतिशत भाग शुल्क रूप में वसूला जाता है।
इसके अलावा बेटरमेंट चार्ज (साउन्नत प्रभार, डेवलपमेंट चार्ज, दस प्रतिशत प्रशासनिक व्यय चार्ज, 12 प्रतिशत फ्रीहोल्ड तथा लीज शुल्क वसूला जाता है। उसके बाद बैनामा कराया जाता है। इसमें भी एमडीए को ही लाभ होता है क्योंकि हर बैनामे में दो प्रतिशत निगम और एमडीए में बंट जाता है। यह शुल्क भी बीस करोड़ रुपये से ज्यादा बनता है। कुछ समायोजन को छोड़कर इसकी भी वसूली नहीं की गई।
1990 से हुआ खेल
सारा खेल सन 1990 से शुरु हुआ। जिस योजनाओं में भू अर्जन हुआ वहां 2005 के बाद ये खेल किया गया। दरअसल तत्कालीन रहे अधिकारियों ने इसमें अपना लाभ कमाया। प्राधिकरण को चूना लगा दिया गया।
जांच में खुलेगी पोल
इस प्रकरण की शिकायत पर आयुक्त स्तर से जांच शुरू की गई । इसमें सारा खेल खुलकर सामने आएगा। जांच के बिंदुओं में यह भी है कि इस अवधि में कौन-कौन से जोनल प्रभारी, योजना प्रभारी आदि शामिल रहे।
जांच शुरू कर दी है
समायोजन में गड़बड़झाले के कुछ केस मेरे पास आए हैं जिनकी जांच शुरू की गई है। अब सारे दस्तावेज जुटाकर जांच होगी। नियमानुसार जिस पर जितना भी शुल्क निकलेगा, वसूल किया जाएगा। -साहब सिंह, वीसी एमडीए
इस जमीन का हुआ समायोजन
शताब्दीनगर- 153931
गंगानगर रक्षापुरम- 60605
स्पोर्ट्स गुड्स कॉम्प्लेक्स - 1749
डिफेंस एन्क्लेव- 1794
पल्लवपुरम- 2268
(जमीन वर्ग मीटर में)