लड़कियों से ज्यादा लड़कों में होता है ऑटिज्म
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस आज
- तीन साल के बच्चे में आने लगते हैं लक्षण
अमर उजाला ब्यूूरो
मेरठ। ऑटिज्म (स्वलीनता) बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने केउद्देश्य से हर साल दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाया जाता है। यह मानसिक बीमारी है, जो लड़कियों से ज्यादा लड़कों में होती है।
ऑटिज्म या आत्मविमोह एक मानसिक रोग या मस्तिष्क के विकास के दौरान होने वाला विकार है, जिसके लक्षण जन्म से या बाल्यावस्था (पहले तीन साल में) में ही नजर आने लगते हैं और व्यक्ति की सामाजिक कुशलता और संप्रेषण क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालती है। चिकित्सकों का कहना है कि कई शोधों से यह बात सामने आई है कि ऑटिज्म से 100 में से 80 फीसदी बालक इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। भारत केसामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार प्रति 110 में से एक बच्चा ऑटिज्मग्रस्त होता है। मेरठ में इस तरह केकाफी बच्चे हैं। वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. भूपेंद्र चौधरी ने बताया कि जिन बच्चों में यह विकार होता है, उनका विकास अन्य बच्चों से असामान्य होता है। साथ ही इसकी वजह से उनके न्यूरोसिस्टम पर विपरीत प्रबाव पड़ता है। इससे प्रभावित व्यक्ति, सीमित और दोहराव युक्त व्यवहार करता है।
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ऑटिज्म के लक्षण
बोलचाल व शाब्दिक भाषा में कमी आना
खुद के इजाद किए शब्दों को बार-बार बोलना
व्यक्ति की आंखों में आंखें डालकर बात करने से घबराना
बच्चों को बहुत ज्यादा डर लगना
अकेला रहना अधिक पसंद करना
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बच्चे की मदद
बच्चों को शारीरिक खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करें
खेल-खेल में उन्हें नए नए शब्द सिखाएं
छोटे-छोटे वाक्यों में बात करें
बच्चे को तनावमुक्त रखें
ज्यादा परेशानी होने पर मनोचिकित्सक से संपर्क करें