फर्जी तरीके से रिजर्व भूखंड आवंटन मामले में दोबारा जांच शुरू
मेरठ। आवास एवं विकास परिषद की आरक्षित श्रेणी की संपत्तियों में फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर करोड़ों की जमीन के आवंटन मामले में दोबारा जांच शुरू हो गई है। मामले में पिछले सप्ताह आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार के निर्देशों पर पांच लोगों को नामजद और परिषद के तत्कालीन अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कराया था। मुख्यारोपी बाबूलाल सहित पूरे गैंग की फाइलें खंगाली जा रही हैं।
आवास विकास परिषद के अधिकारी मुख्य आरोपी शास्त्रीनगर निवासी बाबूलाल गुप्ता, उनकी पत्नी दीपा गुप्ता सहित रामबाबू, राजा भैया, नरेश चंद की फाइलें खंगाली जा रही हैं। संपत्ति विभाग में आरोपी बाबूलाल और पत्नी दीपा गुप्ता का पूरा ब्यौरा तैयार किया जा रहा है। इन पांचों के अलावा आवास विकास परिषद के तत्कालीन संपत्ति अधिकारी एवं कर्मचारी का नौचंदी थाने में मुकदमा दर्ज हो चुका है। पुलिस भी मामले में जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है। इस बड़े खुलासे के बाद आवास विकास परिषद की आरक्षित संपत्तियों के आवंटन की जांच भी शुरू हो गई हैं। जिसमें फर्जी तरीके से जाति प्रमाण पत्र लगाकर भूखंड आवंटित कराने वालाें के लिए मुसीबत पैदा हो सकती है। मामले में संपत्ति अधिकारी नरेश बाबू ने बताया मामले में निर्माण खंड के अधिकारियों ने बाबूलाल से संबंधित फाइलों का संज्ञान लिया है। जिसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उच्च अधिकारियों द्वारा मामले में अन्य आरक्षित भूखंडों की जांच के निर्देश दिए हैं। जिसको लेकर विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है।
हाईकोर्ट में स्टे को लेकर सुनवाई आज
आरक्षित श्रेणी के भूखंडों को फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर आवंटन मामले के मुख्य आरोपी बाबूलाल ने गिरफ्तारी पर स्टे को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें बृहस्पतिवार को सुनवाई होनी हैं। मामले में आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दे रखे हैं। ऐसे में बृहस्पतिवार को आरोपी को हाईकोर्ट से स्टे पर सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी।
खास बातें:
आरक्षित श्रेणी के भूखंडों को फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर भूखंडों पर कराया था आवंटन
परिषद मुख्यारोपी बाबूलाल की फाइलें खंगालने में लगा