साइंटिफिक रिसर्च के लिए वेब ऑफ साइंस जरूरी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि के बृहस्पतिभवन में पुस्तकालय एवं सूचना विभाग और पुस्तकालय के तत्वावधान में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बताया कि वेब ऑफ साइंस का प्रयोग सही ढंग से किया जाए तो इससे न केवल शोध कार्य की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि विश्वविद्यालय की रैंकिंग भी बढ़ जाएगी।
कार्यशाला कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में हुई। अतिथि विशव शर्मा ने लाइव डेमो से वेब ऑफ साइंस तथा एंडनोट पर प्रकाश डालते हुए डाटाबेस को इस्तेमाल करने और इससे शोधकार्य में होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी। भारतीय पुस्तकालय संघ के अध्यक्ष कार्यशाला के मुख्य अतिथि प्रो. शबाहत हुसैन ने कहा कि वर्तमान में पुस्तकालय का स्वरूप बदल गया है। आईसीटी के दौर में पुस्तकालयों की सेवाएं विस्तृत हुई हैं। वेब ऑफ साइंस जैसे डाटाबेस के बिना आज शोध कार्य खासतौर से विज्ञान के क्षेत्र में असंभव है। ऐसे में इस डाटाबेस का शोधार्थी अधिक से अधिक प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि यूजीसी ने इनफ्लाइबनेट के माध्यम से देश के केवल उन पुस्तकालयों को वेब ऑफ साइंस उपलब्ध कराया है। आईसीटी के समस्त उपकरण तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में ये सुविधाएं उपलब्ध हैं। संकायाध्यक्ष कला संकाय प्रो. बीर सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। पुस्तकालय प्रभारी प्रो. राकेश गुप्ता ने विचार रखे। विभागाध्यक्ष तथा कार्यशाला संयोजक डॉ. जमाल अहमद सिद्दीकी ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला। अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने पुस्तकालय द्वारा की गई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का पुस्तकालय इस वक्त प्रदेश में पहले नंबर है, उम्मीद है कि जल्द ही ये देश के टॉप फाइव में होगा। संचालन अलका तिवारी ने किया। इस मौके पर प्रो. हरे कृष्णा, प्रो. अराधना, सरला वर्मा, रेखा रानी, नरेंद्र सिंह, अनमोल मिश्रा, डॉ. प्रवीन कुमार, डॉ. सुभाष आदि मौजूद रहे।
खास बातें:
बृहस्पतिभवन में वेब ऑफ साइंस विषय पर हुई कार्यशाला