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चौधरी चरण सिंह

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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के अंतर्गत राष्ट्रीय कार्यशाला चल रही है। सोमवार को दूसरे दिन मुख्य वक्ता विभाग के सहआचार्य डॉ. राजेंद्र कुमार पांडेय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने हुए कहा कि भारत की संघात्मक व्यवस्था के मौजूदा स्वरूप पर उनके विचारों की प्रासंगिकता अधिक है। अमेरिका की संघात्मक व्यवस्था भारत की व्यवस्था से भिन्न है। स्वशासन एवं सांझा शासन के सूत्र के माध्यम से अखंड अमेरिका अस्तित्व में आया। उन्होंने कहा कि अमेरिका का संघ भी अखंड है और राज्य भी अखंड है, किन्तु भारत में संघ तो अखंड है लेकिन राज्य अखंड नहीं हो सकते हैं। जहां अमेरिका में राज्यों की सीमाओं को परिवर्तित करने का अधिकार नहीं है, लेकिन भारत में राज्यों की सीमाओं को परिवर्तित करने का अधिकार भारतीय संघ को है। उन्होंने भारत में न्यायपालिका एवं विधायिका के बीच बैठते वर्चस्व की जंग एवं हस्तक्षेप पर भी प्रकाश डाला।
विभाग के आचार्य प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के साहित्य को अभी भी संकलित नहीं किया गया है। हमें पढ़ाया गया है कि भारत में अनेकता में एकता है, उन्होंने कहा कि भारत की संकल्पना एक से अनेक की रही है। भारत में अनेक भाषाएं होने के बाद भी भारत की पहचान एक राष्ट्र की है न कि नेशन की। उन्होंने पुरी के जगन्नाथ मंदिर में जाने से यह कहकर मना कर दिया था कि मैं तब तक मंदिर नहीं जाऊंगा जब तक कि मंदिर में सभी वर्गों को प्रवेश नहीं मिलता।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ओमवीर सिंह चौहान ने की। कार्यक्रम का संचालन शिक्षण सहायक प्रो. सुषमा रामपाल ने किया। कार्यक्रम में डॉ. नरेंद्र मोरल, डॉ. देवेंद्र, उज्ज्वल, डॉ. अभय विक्रम सिंह, डॉ. मनोज छोकर, रवि पोसवाल, छात्रा प्रियंका, सानिया, अंजुमन, गीता, कविता, नितिन, सुमित, जिज्ञासा आदि का योगदान रहा।
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