शताब्दी नगर के किसानों को प्रतिकर देने के लिए एमडीए यहीं के सेक्टर आठ स्थित 110 एकड़ जमीन को आवासीय रूप में विकसित करने की कवायद शुरू कर सकता है। ग्रुप हाउसिंग के जरिए इस योजना से यदि सही पैसा आया तो किसानों की अतिरिक्त प्रतिकर की मांग पूरी की जा सकती है। किसानों को पैसा देने के लिए जो नया फार्मूला ईजाद किया गया है, उसके लिए इस पर किसानों के साथ आंकलन शुरू हुआ।
हिसाब आ रहा है कि यदि एमडीए इसी बेचे तो लगभग छह सौ करोड़ रुपये की आय हो सकती है। बशर्तें बिना अवरोध यहां काम हो जाए और निजी बिल्डर इसके लिए तैयार हो जाएं।सोमवार को एमडीए सभागार में चीफ इंजीनियर एससी मिश्रा, एसई शबीह हैदर, तहसीलदार करनवीर सिंह, योजना प्रभारी एससी मिश्रा तथा किसान विनोद जिटौली, संजय दौरालिया, सुभाष घोपला आदि किसानों के साथ मंथन हुआ। एमडीए अफसरों ने बताया कि शताब्दीनगर सेक्टर आठ में 110 एकड़ आवासीय जमीन है। जो ग्रुप हाउसिंग की है। इसमें दो-तीन तीन हजार मीटर के ऐसे भूखंड हैं, जिन्हें ग्रुप हाउसिंग के लिए दिया जा सकता है। डेवलपर को इसे नीलाम किया जा सकता है।
इसे छोटे पार्ट में बेचने के लिए मशाक्कत करनी होगी क्योंकि शताब्दीनगर की तरफ फिलहाल कोई बिल्डर रुख करने को तैयार नहीं है। इस पर किसान बोले कि उन्हें सीधेही 33 सौ रुपये के हिसाब से जमीन दे दी जाए। इस पर अधिकारियों ने कहा कि केवल नए फार्मूले पर ही मंथन करने का निर्देश हुआ है तो उसी पर ही बात हो सकती है। बाकी आलाधिकारी तय करेेंगे। इसकी रिपोर्ट आलाधिकारियों को भेजी जा रही है।
खुद डेवलप करना महंगा
एमडीए प्रति एकड़ चार हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर विकास कार्यों पर खर्च कर आवासीय कालोनी डेवलप करता है। ऐसे में यदि एमडीए इसे डेवलप करेगा तो लगभग 180 करोड़ रुपया इस पर खर्च आ रहा है। यहां आवासीय जमीन का एमडीए रेट 11 हजार 700 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर है। नीलामी में इसका डेढ़ गुना आ जाता है।
यदि 15 हजार रुपये का रेट भी आया तो एमडीए को इससे लगभग छह सौ करोड़ रुपया मिल सकता है। विदित हो कि यहां कुल छह सौ एकड़ जमीन पर एमडीए का कब्जा नहीं है। यदि कब्जा भी मिला और इसे डेवलप करना पड़ा तो एमडीए को इस पर लगभग एक हजार करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। ऐसे में निजी बिल्डरों को जमीन देकर ही एमडीए इस समस्या का समाधान खोज सकता है।
इस बार लोन लेने को तैयार नहीं एमडीए
किसानों को पैसा देने के लिए इस बार एमडीए किसी भी सूरत में ऋण लेने को तैयार नहीं है। पिछली बार एमडीए ने दो सौ करेाड़ रुपये का लोन लिया था, जिसे बैंक एफडी तोड़कर चुकाना पड़ा था। इस बार एमडीए अधिकारियों का साफ कहना है कि यदि इस प्रोजेक्ट से लाभ होगा तो ही एमडीए इस पर काम करेगा क्याेंकि तभी किसानाें को भी पैसा दिया जा सकेगा।
पैसा तो है ही नहीं
किसानों ने कहा कि उन्हें सीधा पैसा दो। एमडीए अधिकारियों ने कहा कि पैसा तो है ही नहीं। किसान चाहें तो अपनी जमीन वापस ले लें और एमडीए को उसका पैसा लौटा दें। यह अंतिम विकल्प है और यदि बात नहीं बनेगी तो फिर यही करना होगा। इस पर किसानों ने कहा कि वे तो तैयार हैं, पर अपनी जमीन बेचकर बाद में एमडीए को उसका पैसा लौटाया जाएगा।