मेरठ। बाइक चलाने का जुनून शहर के युवाओं पर इस कदर चढ़ा कि मेरठ से लद्दाख तक जाने और आने का 3500 किमी का सफर मात्र 12 दिन में पूरा कर लिया। सोल राइडर्स बाइकर्स ग्रुप के 4 सदस्य 21 अगस्त को राइड पर निकले और 2 सितंबर की सुबह लौट आए।
मेरठ से लद्दाख की इस राइड में अक्षय वत्स, रविंदर सेठी, जॉन आशीष, अंकित गोयल शामिल रहे। चारों दोस्तों ने मिलकर इस राइड को पूरा किया। राइड में मेरठ से चंडीगढ़, पठानकोट, उधमपुर, श्रीनगर, सोनमर्ग, कारगिल, लेह, खारदुंगला, पंगोंग झील से होते हुए रोहतांग पास तक पहुंचे। वहां से मनाली होते हुए मेरठ लौटे। राइड में शामिल रहे अक्षय, रविंदर का बिजनेस है। जॉन आशीष फोटोग्राफर हैं। सबसे छोटे अंकित अभी पढ़ाई कर रहे हैं। राइडर्स ने बताया पिछले साल ही हमें इस राइड पर जाना था, लेकिन नहीं जा पाए। इस वर्ष तय कर लिया था कि राइड पूरी करनी है। राइडर्स ने यह सफर दो रॉयल एनफील्ड थंडर वर्ल्ड, एनफील्ड क्लासिक और केटीएम ड्यूक से पूरा किया।
लगा कि अब कभी बर्थडे नहीं मना पाऊंगा
राइडर रविंदर का 2 सितंबर को बर्थडे था। बकौल रविंदर इसी हिसाब से राइड प्लान की थी कि लौटकर बर्थडे मनाऊंगा। राइड के दौरान कई जगह इतने बुरे हालात बने कि हौसला जवाब दे गया। लगा कि घर नहीं लौट सकूंगा और अब कभी बर्थडे नहीं मना पाऊंगा। लेकिन राइड सफलतापूर्वक पूरी हुई। दुर्गम जगह पर हमें रुकना था, लेकिन होटल नहीं मिला। इस पर एक घर में रुकना पड़ा। वहां काफी ठंड थी। हम पूरी रात सो नहीं पाए। जिससे अगले दिन सुबह में ड्राइविंग के दौरान बहुत परेशानी हुई।
चेकिंग थी मगर साहस भी मिला
रोहतांग का संवेदनशील मुद्दा हमारे देश के लिए चुनौती बना हुआ है। चीन-भारत के बीच हालात अच्छे नहीं हैं। ऐसे में लद्दाख का सफर तय करना बाइकर्स के लिए आसान नहीं। रास्ते में जगह-जगह चेकिंग के लिए रुकना पड़ा। आर्मी के जवानों ने कई स्थानों पर रोका। लेह में परमिट लेने में भी मुश्किल हुई। हालांकि हर छोटी-बड़ी जगह पर लोगों ने हौसला बढ़ाया। ऑफ रोड, कच्ची सड़क और चट्टानों पर पूरा सफर किया। राइड की शुरुआत 650 किलोमीटर प्रतिदिन से हुई थी, लेकिन आगे जाकर रास्ता इतना खराब होता गया कि बाइकर्स का सफर 200 किमी पर सिमटकर रह गया।