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मरीजों का एकमो से उपचार कर किया जा रहा भ्रमित

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मरीजों को एकमो से उपचार कर किया जा रहा भ्रमित
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। स्वाइन फ्लू, डेंगू और मौसमी बुखार का इलाज मेरठ में उपलब्ध है। इसके बावजूद दिल्ली में एकमो तकनीक से स्वाइन फ्लू केमरीजों को उपचार के बहाने भ्रमित किया जा रहा है, जबकि मोटे खर्च के बावजूद एकमो मरीज के जान बचाने की कोई गारंटी नहीं देता है। यह जानकारी केएमसी हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर में बृहस्पतिवार को हुई प्रेस कांफ्रेंस में दी गई।
केएमसी के चेयरमैन डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि वेंटीलेटर से मरीज को फायदा होता है और डॉक्टरों को समय मिल जाता है कि वह बेहतर इलाज कर सकें। वेंटीलेटर लगाने का मतलब यह नहीं है कि मरीज आखिरी स्टेज पर है। इसे लोगों को समझना चाहिए। वेंटीलेटर सांस को सपोर्ट करता है।
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डॉ. विनय अग्रवाल, डॉ. संदीप जैन, डॉ. अमिताभ गौतम, डॉ. अविनाश जौहरी, डॉ. पीके जैन, केएमसी की निर्देशिका डॉ. प्रतिभा और डॉ. रेनू बंसल ने बताया कि जो मरीज वेंटीलेटर पर ठीक नहीं हुआ, वह एक्सट्राकॉर्पोरल मेम्ब्रेन ऑक्सीजिनेशन (एकमो) तकनीक से ठीक हो जाए, यह जरूरी नहीं है। एकमो उन मरीजों के लिए है, जिनके फेफड़े और दिल काम नहीं कर रहा है। इस तकनीक में रोगी के शरीर के खून से कृत्रिम विधि द्वारा कार्बन डाई ऑक्साइड और रेड ब्लड सेल को रिमूव किया जाता है। एकमो बच्चों के लिए शुरू की गई थी, अब व्यस्कों में भी इसका इस्तेमाल होने लगा है। आजकल मेरठ से दिल्ली में काफी मरीजों को एकमो पर स्थानांतरित किया जा रहा है और लोगों को अनावश्यक रूप से प्रतिदिन का लाखों का खर्च वहन करना पड़ रहा है। केएमसी में इस तरह के रोगियों के लिए अलग से आइसोलेशन आईसीयू उपलब्ध है और निरंतर रोगियों का इलाज चल रहा है। भारत में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या अगस्त 2017 में ही 350 पहुंच चुकी है। अभी एकमो व्यवस्था मेरठ में उपलब्ध नहीं है।

इलाज में न बरतें कोताही
डॉक्टरों ने बताया कि इलाज में किसी तरह की कोताही न बरतें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराएं। जबकि स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइंस के हिसाब से स्वाइन फ्लू केसंबंध में तीन स्टेज बनाई गई हैं, जब मरीज तीसरी स्टेज में पहुंचे, तभी उसे स्वाइन फ्लू के टेस्ट कराने चाहिए, इसी कारण मरीजों की संख्या नहीं रुक रही है।
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डॉक्टर के लिखने पर भी नहीं देते टेमी फ्लू
डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि स्वाइन फ्लू केसंबंध में निजी लैबों की जांच को स्वास्थ्य विभाग नहीं मानता है, जबकि कई बार सरकारी लैब से जब तक मरीज की रिपोर्ट आती है, तब तक उसकी मौत भी हो जाती है। मेरठ में इस तरह केकई केस आ चुकेहैं, फिर भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। साथ ही डॉक्टरों केलिखने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग से टेमी फ्लू की दवाइयां नहीं दी जा रही हैं। दूसरी तरफ, इस संबंध में सीएमओ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग बिना किसी जांच केमरीज के तीमारदारों तक को टेमी फ्लू की दवाई दे रहा है। जहां तक सरकारी रिपोर्ट को ही सही मानने की बात है तो यह शासन स्तर से निर्णय लिया गया है।

स्वाइन फ्लू से रोकथाम के दिए टिप्स
गर्म पानी, सूप और चाय-कॉफी पिएं।
गुनगुने पानी से गरारे करें।
हाथ मिलाने से बचें और साबुन से हाथ धोएं।
हाथों को चेहरे, नाक और आंखों पर न लगाएं।
लगातार बुखार, खांसी, हड़कल और जुकाम बने रहने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

खास बात
स्वाइन फ्लू के कई मरीज करा रहे दिल्ली में उपचार, चिकित्सकों वेंटीलेटर और एकमो की जानकारी
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