शिव भक्तों की सेवा पर धन का संकट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
शिव भक्तों की सेवा पर भी धन का संकट दिखाई दे रहा है। धन के अभाव में जहां शिविरों की संख्या कम हुई है, वहीं शिविर में परोसे जा रहे व्यंजन भी कम हुए हैं। जमीन के कारोबार में मंदी और नोटबंदी का असर कांवड़ शिविरों पर साफ दिखाई दे रहा है।
पहले महानगर की सीमा में लगने वाले सेवा शिविरों में खाने और नाश्ते में खूब वैरायटी होती थी। खाने में मटर, मखनी दाल, कढ़ाई पनीर, मटर पनीर, हलवा आदि की व्यवस्था होती थी। नाश्ते में फलों के जूस, मखानों की खीर, मुरादाबादी दाल, चीले, कुल्फी, आइसक्रीम, ढोकला, पाव, टिक्की, मटर व फलों की चाट भी रहती थी। ये आइटम इस बार कांवड़ शिविरों से लगभग गायब हैं। कुछ ही शिविरों में इनमें से दो-चार व्यंजन दिख रहे हैं। शिविरों से व्यंजनों के गायब होने के पीछे धन का अभाव बताया जा रहा है।
रालोद नेता सुनील रोहटा का कहना है कि ढाई साल से प्रॉपर्टी का कारोबार मंदी की चपेट में है। टीम के सभी सदस्य मिलकर बाईपास पर विशाल कांवड़ शिविर लगाते थे। लेकिन इस बार टीम के कुछ सदस्यों ने सहयोग नहीं किया। वहीं व्यापारी नेता नीरज मित्तल का कहना है कि वह पिछले कई साल से खिर्वा चौपले पर ही कांवड़ शिविर लगाते हैं। इस बार कारोबार में मंदी का असर कांवड़ शिविरों पर पड़ा है। लेकिन सावन आते ही अपने आप सेवा भाव जाग जाता है।
समाज सेवी मुकेश सैनी का कहना है कि गांव खड़ौली सहित कई गांवों के लोगों की एक टीम है। जो कई साल से भोला रोड चौराहा बाईपास पर कांवड़ शिविर लगा रहे हैं। टीम में कुछ प्रॉपर्टी डीलर जुड़े थे। दो साल से प्रॉपर्टी का काम ठप है। इस कारण इस साल शिविर लगाने में सभी ने हाथ खड़े कर दिए। हालांकि भगवान की कृपा से शिविर लगाया गया है, लेकिन खर्च में कटौती की गई है।
प्रमुख बातें===
- बीते सालों की तुलना में शिविरों में आधी रह गईं सुविधाएं
- नहीं मिल रहे दानदाता, नोट बंदी और जीएसटी का बता रहे असर