मेरठ। यात्रियों का सफर सुखद और दुर्घटना मुक्त बनाने के लिए रेलवे तेजी से कार्य कर रहा है। इसी क्रम में रेलवे ट्रैक को मजबूत बनाने के लिए स्लीपर बदले जा रहे हैं। 13 सितंबर से शुरू हुए अभियान में कैंट स्टेशन से खतौली यार्ड तक दस हजार स्लीपर बदले जा चुके हैं। इस कार्य को आसानी से ट्रैक रिलेयिंग ट्रेन मशीन से किया जा रहा है। जिससे कार्य को कम समय में मजबूती से पूरा किया जा सके।
बता दें, देश में रेल दुर्घटना को खत्म करने के लिए पिछले दो वर्षों में ट्रैक पर तेज गति से कार्य किया गया। ट्रैक का वजन 52 किग्रा से बढ़ाकर 60 किग्रा कर दिया गया। इसके बाद 60 किग्रा के स्लीपर बदलने की प्रक्रिया को शुरू किया गया। कैंट स्टेशन से पावली खास तक सभी स्लीपरों को बदला जा चुका है। कई वर्षों पुराने इन स्लीपर में दरारें आ गईं थीं। इसके बाद रेलवे ने यह कदम उठाया है।
चार घंटे में बदले 1200 स्लीपर
ट्रैक रिलेयिंग ट्रेन मशीन की सहायता से कई किलोग्राम वजन के स्लीपरों को आसानी से बदला जा रहा है। मशीन को दो फ्लोर में बांटा गया है। प्रथम फ्लोर से पुराने स्लीपर को ऊपर लाया जाता है। इसके बाद नए स्लीपरों को मशीन की सहायता से ट्रैक पर रख दिया जाता है। सहायक मंडलीय अभियंता श्याम चंद ने बताया कि चार घंटे में 1232 स्लीपर को बदला गया है।
सिटी स्टेशन से कैंट तक इंतजार
हालांकि, अभी सिटी स्टेशन से कैंट स्टेशन के बीच स्लीपर को नहीं बदला गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस हिस्से के लिए रेलवे ने अभी स्वीकृति नहीं दी है। रेलवे मुख्यालय से स्वीक़ृति मिलने के बाद यहां का कार्य भी तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। कैंट स्टेशन से पावली खास, सकौती यार्ड, खतौली यार्ड, मंसुरपुर यार्ड, नागल से तलहेड़ी के बीच स्लीपर बदले जा चुके हैं।