10 साल पुराने छात्र करा सकेंगे डिवीजन इंप्रूवमेंट, मिलेगी मूल मार्कशीट
मेरठ। सीसीएसयू कैंपस-कॉलेजों में वर्ष 2010 तक के यूजी-पीजी के छात्र-छात्राओं को विवि ने डिवीजन इंप्रूवमेंट करने का मौका दिया है। यह व्यवस्था इसी साल लागू होगी। नए सत्र से नई शिक्षा नीति लागू होने के कारण नए नियम लागू होंगे। ऐसे छात्र-छात्राओं को वर्तमान सिलेबस के मुताबिक ही पेपर देकर श्रेणी सुधार का मौका मिलेगा। वहीं, सेमेस्टर और वार्षिक सभी में मार्कशीट की मूल प्रति दी जाएगी। मूल्यांकन नहीं करने वाले शिक्षकों को विवि अब प्रैक्टिकल में परीक्षक नहीं बनाएगा।
कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में शनिवार को विवि में हुई परीक्षा समिति की बैठक में इन निर्णयों पर मुहर लगा दी गई। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि फिलहाल दो साल तक ही छात्रों को श्रेणी सुधार परीक्षा देनेे का मौका दिया जाता था। अब 10 साल पुराने छात्र-छात्राएं भी डिवीजन इंप्रूवमेंट के लिए परीक्षा दे सकते हैं। इस बारे पूरी गाइडलाइन सोमवार तक जारी कर दी जाएगी। ऐसे छात्रों की परीक्षा 12 अप्रैल से शुरू होने वाली वार्षिक और प्राइवेट की परीक्षाओं के साथ ही होंगी। नए सत्र से नई शिक्षा नीति में दूसरे नियम लागू होंगे। इसके साथ ही अगर किसी ने पीजी पहले वार्षिक प्रणाली में किया था तो उसे श्रेणी सुधार में अबके सिलेबस यानी सेमेस्टर की परीक्षा देनी होगी। फिलहाल यह नियम अब तक के सत्र के छात्र-छात्राओं के लिए बनाया गया है। इसके अलावा आठ मार्च को हुई एमएससी फिजिक्स की परीक्षा के आउट ऑफ सिलेबस आने के मामले में निर्णय लिया गया कि कमेटी बनाकर मूल्यांकन किया जाएगा ताकि छात्रों को कोई नुकसान न हो।
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प्रैक्टिकल के अंकों में लापरवाही पर होगी कार्रवाई
- बीएड में बहुत से कॉलेजों द्वारा प्रैक्टिकल के अंक देरी से भेजे जाने पर नाराजगी जाहिर की गई। चेतावनी दी गई कि प्रैक्टिकल के अंक पोर्टल पर देरी से अपलोड करने वाले कॉलेजों की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2011 के बाद के जिन छात्र-छात्राओं के एमएड के डेजरटेशन छूट गए थे, उन्हें डेजरटेशन जमा कराकर डिग्री दी जाएगी। यह भी निर्णय लिया गया कि जिन छात्र-छात्राओं ने कालबाधित होते हुए परीक्षा फार्म भरकर परीक्षा दी, ऐसे छात्र-छात्राओं की मार्कशीट भी जारी होगी।
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जेंडर-नाम में बदलाव हाईस्कूल-12वीं के प्रमाण पत्रों के आधार पर ही होगा
- कई छात्र-छात्राओं ने मार्कशीट में नाम परिवर्तन को लेकर राजभवन भी शिकायत की थी। ऐसे प्रकरणों में स्पष्ट किया गया कि जब तक हाईस्कूल और 12वीं के प्रमाण पत्र में नाम बदलाव नहीं किया जाएगा तब तक विवि मार्कशीट के नाम में बदलाव नहीं करेगा। इसी तरह से एक छात्रा ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई सीसीएसयू से पूरी की।
पिछले साल छात्रा ने जेंडर बदल लिया। डॉक्टर्स के सारे प्रमाण पत्र दिए गए कि छात्रा के नाम की जगह अब वो छात्र के नाम की मार्कशीट जारी कराना चाहते हैं। इस पर परीक्षा समिति ने कहा कि जब तक पुराने प्रमाण पत्रों में जेंडर नहीं बदलेगा, तब तक विवि न नाम बदल सकता है और न ही जेंडर।
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