मेरठ। भारी घाटे से जूझ रहा परिवहन निगम अनावश्यक खर्चों पर लगाम कसने में नाकाम है। एक लाख रुपये की स्टेशनरी वितरण के लिए तीन कर्मचारियों को लगाया हुआ है। इनके वेतन पर हर महीने डेढ़ लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। इससे पहले स्टेशनरी वितरण के लिए एक कर्मचारी तैनात रहता था। अब स्टेशनरी वितरण में लगे कर्मचारी संगठन के क्षेत्रीय नेता की सहायता के लिए दो अन्य कर्मचारियों को लगाकर अनावश्यक खर्च बढ़ा दिया है। इसकी निगम में चर्चा जोरों पर है।
मेरठ रोडवेज रीजन स्तर से पांचों डिपो मेरठ, सोहराबगेट, गढ़मुक्तेश्वर, बड़ौत और भैसाली के लिए हर महीने स्टेशनरी जारी की जाती है। निगम ने स्टेशनरी वितरण के लिए रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के क्षेत्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ लिपिक लाखन सिंह को जिम्मेदारी दी है। इनकी सहायता के लिए कनिष्ठ लिपिक राजेंद्र सिंह एवं एक अक्षम चालक को लगा रखा है। तीनों कर्मचारियों के वेतन पर हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। हालांकि स्टेशनरी करीब एक लाख रुपये की जारी की जाती है। इससे पहले इस व्यवस्था को एक अकाउंटेंट देखता रहा है। बीते कई साल से तीन कर्मचारियों को लगाकर अनावश्यक खर्च बढ़ाया जा रहा है। इस बारे में आरएम नीरज सक्सेना ने जानकारी से इनकार किया है। उनका कहना है कि यदि ऐसा है तो वे इसकी रिपोर्ट मंगवाएंगे।