वरिष्ठ पत्रकार सत्यम वर्मा और दिशा छात्र संगठन की सदस्य एवं थिएटर आर्टिस्ट आकृति चौधरी पर एनएसए लगाए जाने तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं को फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने के विरोध में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में कार्यकर्ताओं ने साझा विरोध प्रदर्शन किया।
इसके बाद राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। विरोध प्रदर्शन के दौरान इंकलाबी मजदूर केंद्र के रामजी सिंह ने कहा कि फासीवादी सरकार और उसकी पुलिस नोएडा तथा मानेसर में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और कानूनों की अनदेखी कर बुद्धिजीवियों, छात्रों, मजदूर कार्यकर्ताओं और मजदूरों को दबाने का काम कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने वरिष्ठ पत्रकार, अनुवादक और ‘भगत सिंह संपूर्ण दस्तावेज’ के संपादक सत्यम वर्मा सहित कई मजदूर कार्यकर्ताओं को बिना ठोस सबूत और वैध कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया।
उन्होंने कहा कि दो से तीन दिन तक उन्हें गायब रखा गया। रामजी सिंह के अनुसार सत्यम वर्मा पिछले 12 वर्षों से अधिक समय से नोएडा नहीं गए हैं, जबकि पुलिस उन्हें मुख्य साजिशकर्ता साबित करने में लगी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रूपेश और आदित्य आनंद पर भी पुलिस हिंसा भड़काने का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि वीडियो में दोनों मजदूरों को शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए शपथ दिलाते दिखाई दे रहे हैं।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सत्यम, रूपेश, आदित्य, हिमांशु, आकृति, सृष्टि, मनीषा तथा मानेसर के अजीत, श्यामवीर, हरीश, पिंटू, राजू और आकाश समेत कई मजदूरों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा गया है। उन्होंने मांग की कि सभी मुकदमे वापस लेकर निर्दोष लोगों को रिहा किया जाए।
विरोध प्रदर्शन को नौजवान भारत सभा के प्रसेन, जागरूक नागरिक मंच के प्रद्युम्न, क्रांतिकारी लोकअधिकार संगठन के सिकंदर, सीपीआई के जिला सचिव रामऔतार सिंह, सीपीआई (एम) के जिला सचिव अब्दुल अजीम, एआईसीपीआई (यू) के प्रांतीय सचिव राम प्रवेश यादव, सीटू के जिला सचिव शिवाकांत मिश्र, चीनी मिल वर्कर्स यूनियन के शंभूनाथ चौधरी, कताई मिल यूनियन के श्रीराम, ओम प्रकाश, अजय कुमार गोंड आदि ने संबोधित किया।
इस दौरान पिंकी, विश्वराज, सिकंदर, हरिश्चंद्र, रामबदन, रामसरन, रामधनी, राजकुमार, रमेश, छविनाथ शर्मा, सुग्गन यादव, अनुभव दास और शिवमूरत आदि मौजूद रहे।