मऊ। सरकार ने महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार लगभग हर क्षेत्र में दिया है। रक्षा, अनुसंधान, विज्ञान, अध्यापन, साहित्य, शोध, खेल, उड्डयन, राजनीति, सरकारी नौकरियों से लेकर सभी क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों के समान गौरवशाली सहभागिता निभा रही हैं। ऐसे में महिलाएं ग्राम पंचायतों के आगामी चुनावी समर में अपनी सहभागिता निभाने के लिए तैयार हैं। ऐसी महिलाएं अपने परिवार के सदस्यों और सहेलियों के साथ चुनावी समर में अपनी दमदार उपस्थिति दर्शाने के आगे आ रही हैं।
यूं तो त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव की तैयारियां अभी चल रही हैं। मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम अभी चल रहा है। पांडुलिपियों के सत्यापन का काम अब अंतिम चरण में हैं। कुछ ही दिन में मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाश भी हो जाएगा। इसके बाद परिसीमन और आरक्षण का प्रक्रिया अपनाई जाएगी। ग्राम प्रधान, बीडीसी और ग्राम पंचायत सदस्य पदों के लिए आरक्षण किए जाएंगे। लेकिन इससे पूर्व ही कुछ जागरूक परिवारों की महिलाएं अभी से ग्राम पंचायत चुनावों की तैयारी में लग गई हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को भी राजनीति के हर क्षेत्र में अपनी दमदार सहभागिता निभाने को तत्पर रहना चाहिए। अब वह दौर खत्म हो गया जब महिलाओं को राजनीति में खासकर ग्राम पंचायत चुनावों में पुरुषों की बैसाखी की जरूरत होती थी। इसलिए कुछ महिलाएं अभी से चुनावी समर में अपना भाग्य आजमाने के लिए तत्पर हैं।
इंदारा गांव निवासी अनीता यादव कहती हैं कि मैं अभी से पंचायत चुनाव में प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। उनका मानना है कि अगर प्रधान का पद सामान्य महिला अथवा अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित नहीं हो गया तो मैं निश्चित तौर पर प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ूंगी।
इंदारा गांव की युवा महिला बीमा सिंह कहती हैं कि ेमैंने प्रधान पद का चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। हमारे परिवार के सभी सदस्यों का मुझे समर्थन हासिल है। परिवार और गांव के अधिकांश शुभचिंतकों ने मुझे प्रधान पद का चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है।
महुआर गांव की अंकिता सिंह कहती हैं कि पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान पद का चुनाव लड़ना है। चुनाव में जीत दर्ज कर गांव के पिछड़ेपन को दूर करना है।गांव में बहुत से बाकी रह गए विकास कार्य कराने हैं।
रतनपुरा ब्लाक के गड़वा गांव की प्रिया यादव कहती हैं कि अब तक इस गांव के प्रधान केवल पुरुष ही होते आए हैं। ये प्रधान महिलाओं से जुड़ी कई समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं होते , लिहाजा गांव में अपेक्षा के अनुरूप विकास कार्य नहीं हुए हैं। परिवार , दोस्तों और गांव के युवा मतदाताओं ने मुझे चुनाव लड़ने का सुझाव दिया है। मैं चुनाव लड़ूंगी और चुनाव जीतकर गांव का चतुर्दिक विकास कराकर एक आदर्श प्रस्तुत करूंगी।