अजीब संयोग है कि मुहम्मदाबाद गोहना विधान सभा सुरक्षित क्षेत्र से चुनाव जीतने वाला प्रत्याशी जिस पार्टी का होता है, प्रदेश में उसी की सरकार बनती है। बीते आठ चुनावों के परिणाम इसकी पुष्टि करते हैं। सन 1984 से 2012 तक के बीच संपन्न हुए विधान सभा चुनावों पर एक नजर डालें तो यह संयोग हकीकत साबित होता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 1977 के बाद केवल एक बार सन 1980 के मध्यावधि चुनाव में ऐसा नहीं हो सका। 1977 मे जब प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार पहली बार सत्ता मे आई तो मुहम्मदाबाद गोहना में इस पार्टी के शिवप्रसाद ने जीत दर्ज कराई थी।
लेकिन फिर तीन साल बाद हुए चुनाव में भाकपा के तपेश्वर राम ने कई दिग्गजों को पटखनी देकर यहां से जीत हासिल की। लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। उसके बाद वर्ष1984 के चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो यहां से इस पार्टी के रामबदन राम विधायक चुने गए थे। इसी क्रम में 1989 में बसपा ने पहली बार यहां अपना खाता खोला, और प्रत्याशी फौजदार प्रसाद विधायक चुने गए। उस कार्यकाल में जनता दल की सरकार में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने, लेकिन भाजपा और बसपा का समर्थन प्रदेश सरकार को मिला था। इसके बाद 1991 के विधान सभा चुनाव में पहली बार प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी, और उस समय मुहम्मदाबाद गोहना से भाजपा प्रत्याशी श्रीराम सोनकर ने जीत हासिल की।
1993 के चुनाव में बसपा और सपा के गठबंधन में हुए चुनाव में यहां से एक बार फिर से बसपा प्रत्याशी फौजदार प्रसाद ने जीत दर्ज की और वह प्रदेश सरकार मे मंत्री भी बनाए गए। 1996 के चुनाव में फिर से पासा पलट गया। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और इसी दल के श्रीराम सोनकर ने दूसरी बार जीत दर्ज की, और वह भी प्रदेश सरकार मे मंत्री बने। इसके बाद 2002 के विधान सभा चुनाव में सपा की सरकार में इसी पार्टी के बैजनाथ पासवान यहां से विधायक रहे, तथा 2007 में प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने वाली बसपा सरकार के ही राजेंद्र कुमार विधायक चुने गए।
2012 के विधान सभा चुनाव मे भी यही रिकार्ड कायम रहा। चुनाव के बाद परिणाम सपा के पक्ष मे रहा और एक बार फिर से सपा की सरकार बनी, तो सपा के ही बैजनाथ पासवान यहां से विधायक चुने गए। 2017 का चुनाव भी अब रंग पकड़ने लगा है। सभी दल सरकार बनाने का दावा कर रहे है। मौजूदा चुनाव मे भी सभी प्रमुख दलों के प्रत्याशी आमने सामने टक्कर देने को तैयार है। अब देखना है कि पहले के समीकरणों के अनुसार प्रदेश में सरकार बनाने वाले दल का प्रत्याशी जीतता है या 2017 के चुनाव में उपरोक्त संयोग मिथ्या साबित हो जाएगा।