नवागत पुलिस अधीक्षक ने अपने कहे अनुसार शुक्रवार को दस बजे से जनता की शिकायतें अपने कार्यालय में सुनी। इस बीच जो भी मामले आए उसका सीधे थानाध्यक्ष से बातचीत कर निष्पक्षता से निस्तारण करने को कहा।
जनता दरबार में पहुंचे एक सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेताओं की शिकायत को उन्होंने सुना जरूर लेकिन दो टूक जवाब भी दिया। एक दरोगा को पुलिस चौकी से हटाने के लिए कहने पर उन्होंने कहा, नेताजी मैं ट्रांस्फर-पोस्टिंग में विश्वास नहीं करता। दरोगा की शिकायत है तो बताओ, जांच कराकर सीधे सस्पेंड करूंगा। बेवजह किसी को इधर उधर करना मेरी आदत नहीं।
नेताजी की शिकायत पर एसपी ने जब उक्त दरोगा की एक भी शिकायत पूछी, तो वे एक बाइक नहीं छोड़ने की बात कह पाए। पूरे मामले को गंभीरता से सुनने के बाद पुलिस अधीक्षक ने नेताजी को कहा कि जनता की शिकायत को लेकर वह बेधड़क पुलिस से मिलें, लेकिन मामला ट्रांसफर-पोस्टिंग का न होकर जनता के हित का हो।
साथ ही कहा कि वाहनों की चेकिंग कराने के पीछे उनका मकसद बेवजह शरीफ या आम लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था टाइट रखना है। कहा कि अगर किसी सम्मानित व्यक्ति को इससे परेशानी है तो वह अपना परिचय दे और सम्मानित व्यक्ति से परिचय कराए साथ ही वाहनों का कागजात आदि सही लेकर चले, किसी को कोई दिक्कत नहीं होगी।
जनता दरबार में विवेचना से जुड़ी एक दरोगा की शिकायत आने पर उन्होंने तलब कर मामले में वार्ता को कहा। वहीं अधिकांश जमीनी संबंधि शिकायतें आने पर सभी से समाधान दिवस पर पहुंचकर थाने में मामला दर्ज कराने का सुझाव दिया।
जनता दरबार में इस प्रकरण के बाद एक और सत्ता पक्ष से जुड़े नेताजी पहुंचे उन्होंने तो हद कर दी। बोले, एक दरोगा को हमारे यहां पोस्ट कर दीजिए तो वह मुस्कुराकर टाल गए। बोले, नेताजी जो आपके यहां दरोगा है उसकी सही शिकायत दर्ज कराइए, जांच कराऊंगा तभी हटेगा।
जनता दरबार के बाद पुलिस अधीक्षक ने कहा कि उनका पूरा प्रयास है कि थानों पर भी जनता की शिकायतें सुनी जाएं और उसका निस्तारण हो ताकि उनके यहां भीड़ कम लगे। वैसे वह हर मामले को सुनने के लिए बैठे हैं। जन शिकायतों का निष्पक्षता से निस्तारण करना प्राथमिकता है।