रक्तदान न सिर्फ दूसरों लोगों की जिंदगी बचाने का जरिया बन रहा, बल्कि खुद को भी जीवनदान दे रहा है। दरअसल, युवाओं को पता ही नहीं चल रहा है कि वे एचआईवी और हेपेटाइटिस बी व सी की चपेट में आ रहे हैं।
जनवरी 2025 से जनवरी 2026 तक 782 लोग रक्तदान करने पहुंचे। ब्लड बैंक कर्मियों ने जांच की तो चार एचआईवी संक्रमित मिले, जबकि 20 लोगों में हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित मिले।
जांच से पूर्व इनको इस बीमारी से अनभिज्ञ थे, अब उनका उपचार किया जा रहा है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंकों की एक जनवरी 2025 से जनवरी 2026 तक लोग रक्तदान करने पहुंचे थे। रक्तदान करने से पहले जांच होती है, इस जांच के दौरान 2025 में तीन लोग एचआईवी के शिकार निकले हैं, जबकि एक बीते जनवरी माह में निकला है।
इसमें बीते जनवरी माह में निकला युवक गाजीपुर जिले का निवासी था, जो अपने दोस्त के कहने पर उसके परिजन के लिए रक्तदान करने पहुंचा था। इन मरीजों में अधिकांश 20 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं।
इसी तरह से 2025 में जांच में ब्लड बैंक में पांच रक्तदाता बीमार मिले हैं, जबकि आठ हेपेटाइटिस सी और 10 हेपेटाइटिस बी से पीड़ित पाए गए।
वहीं 2026 में जनवरी में हैपटाइटिस बी का एक तो हैपटाइटिस सी का एक मरीज जांच के दौरान मिला। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की रिपोर्ट के बाद अस्पताल के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन लोगों से संपर्क किया और इलाज शुरू कराया है।