हलधरपुर थाना क्षेत्र के अरदौना गांव निवासी विपुल यादव का शव 27 अप्रैल की सुबह घर से करीब 200 मीटर दूर खेत में पड़ा मिला था। उसके सिर पर गहरे चोट के निशान थे। मां लक्ष्मी देवी ने हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी।
एएसपी अनूप कुमार ने बताया कि हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही थी। मामले की गहराई से जांच के लिए थाना पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम को लगाया गया था। शव मिलने के बाद गांव के एक परिवार के सभी सदस्य घर में ताला लगाकर फरार हो गए थे, जिससे उन पर संदेह गहरा गया।
गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी देती पुलिस।
- फोटो : संवाद
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने अरदौना निवासी सीआईएसएफ जवान रामानंद यादव और संजय यादव को गिरफ्तार किया। रामानंद की वर्तमान में दिल्ली मेट्रो में तैनाती है और वह पांच दिन की छुट्टी लेकर घर आया था।
पूछताछ में दोनों ने बताया कि रामविलास उनका पट्टीदार है। गांव के ही विपुल यादव का उनकी बेटी से प्रेम संबंध चल रहा था। 26 अप्रैल की रात वह किशोरी को अकेला पाकर घर में घुस गया।
इस दौरान पंकज यादव ने उसे देख लिया और घर के लोगों ने उसे पकड़ लिया और मारपीट की। इसी दौरान घर में पड़े पेचकस से संजय यादव ने उसके सिर पर वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव को हाथ-पैर बांधकर खेत में फेंक दिया गया। आरोप है कि रामानंद की पत्नी सरोज ने भी इसमें साथ दिया।
एएसपी ने बताया कि मां की तहरीर पर प्रेमिका किशोरी, उसकी मां अंजू यादव, रामनरेश यादव उर्फ नान्हू, पंकज यादव और धीरज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। ये सभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही है।
किशोरी के पूर्व प्रेमी ने दी थी हत्या की धमकी
विपुल की मां लक्ष्मी देवी और चचेरे भाइयों ने बताया कि हत्या के बाद किशोरी के चाचा ने फोन कर कहा था कि तुम्हारे बेटे को मारकर सुधार दिया है, आकर ले जाओ। परिजनों का कहना है कि दोनों के बीच करीब डेढ़ साल से बातचीत चल रही थी। इसकी जानकारी होने पर किशोरी के चचेरे भाई अक्सर विवाद करते थे और कई बार जान से मारने की धमकी भी दी थी। इसके अलावा किशोरी के एक पूर्व प्रेमी ने भी स्कूल आते-जाते समय विपुल को रास्ते में घेरकर धमकी दी थी।
विपुल के परिजनों ने कहा- साजिश के तहत हुई हत्या
मां और चचेरे भाइयों ने आरोप लगाया कि आरोपी पुलिस के सामने मनगढ़ंत कहानी बता रहे हैं। उनका कहना है कि विपुल की हत्या की साजिश पहले से सुनियोजित थी। गांव के लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 26 अप्रैल की शाम किशोरी को घर से कहीं ले जाया गया था और वहीं से उसे फोन कर विपुल को बुलवाया गया, जिसके बाद घात लगाकर हमला किया गया।