बारिश के बाद संक्रामक बीमारियां फैलने लगी हैं। विशेषकर घनी आबादी में लोग बुखार की चपेट में आ रहे हैं। सभी स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की जांच में डेंगू के मरीज भी मिले हैं। विभाग की तरफ से सभी विकास खंड को गांवों में लार्वासाइड के छिड़काव के लिए 15 लीटर दवा दी गई है लेकिन अभी तक किसी भी गांव में इसका छिड़काव नहीं कराया गया है। लापरवाही का आलम उस समय है जब डेंगू गांव से लेकर शहर तक फैल हुआ है। अस्पतालोें में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जनपद में कुल नौ ब्लाॅकों में 645 ग्राम पंचायतों में 1454 राजस्व गांव है। इसके साथ ही एक नगर पालिका सहित दस नगर पंचायत है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अन्य विभागों के सहयोग से गांव और नगर में सफाई के साथ चूना और लार्वासाइड के छिड़काव करने के हर वर्ष शासन द्वारा धन का आवंटन किया जाता है। एक तरफ स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी नगर क्षेत्र में नगर पालिका के साथ गांवाें में सीएचसी के माध्यम से छिड़काव किया जाता है। लेकिन दावाें के विपरित जिले की हकीकत है। गांव से लेकर नगर में अनेक स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, नालिया साफ नहीं होने से पानी ओवर फ्लो होकर बह रही है।
ग्राम सभा के स्वच्छता समिति के मद में गांव की सफाई के लिए ग्राम प्रधान और आशा के संयुक्त खाते में हर वर्ष दस हजार रुपया मिलता है। सफाई कर्मी द्वारा नाली की सफाई के साथ लार्वासाइड के छिड़काव कराने का भी आदेश है।
डेंगू के 70 फीसद मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से
जिले में अभी तक डेंगू के कुल 46 मरीज मिले है, इसमें करीब 70 फीसद मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से ही मिले है। एहतियात के तौर पर नगर में कुल पांच हाट स्पाट बनाया गया है। जबकि पांच सक्रिय मरीजों को निजी अस्पतालों में उपचार चल रहा है। वही सरकारी अस्पतालों में डेंगू के भर्ती मरीजाें का आकड़ा शून्य है।
कोट
सभी ग्राम सभाओं में रोस्टर बनाया गया है, एक राेस्टर में सात से आठ सफाईकर्मी को रखा गया है। ग्राम प्रधान की मांग पर चूना और लार्वासाइड का छिड़काव भी किया जाता है। -राजेंद्र प्रसाद, डीपीआरओ
जनपद की सभी सीएचसी पर लार्वासाइड उपलब्ध है, आवश्यकता होने पर कोई भी ग्राम प्रधान वहां से दवा लेकर छिड़काव कर सकते हैं।
- बेदी यादव, जिला मलेरिया अधिकारी