मऊ। सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के पुस्तकालय भवन में बुधवार को अधिवक्ता समागम का आयोजन किया गया। इस दौरान उच्च न्यायालय इलाहाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि ग्राम न्यायालय, लोक अदालत और अधिकरण न्यायिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। ग्राम न्यायालय और लोक अदालत निरर्थक व्यवस्था है। उनका न्याय देने और कार्य करने का जो डाटा है वह असंतोष जनक है। वह अपने मौलिक उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कहा कि जो वर्तमान न्यायिक व्यवस्था है, उसका इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरा नहीं है। न्यायिक विभाग में रिक्तियां बनी हुई हैं। अधिवक्ताओं के बैठने और वादकारियों की सुविधाओं का अभाव है। ग्राम न्यायालय का सृजन एक मजाक और निरर्थक है। कहा कि लोक अदालतों मे करोड़ों रुपये के लोकधन का व्यय हो रहा है, जो जनता पर भार है। अवकाश के दिनों मे लोक अदालतों का आयोजन करने के बजाय नियमित अदालतों में समझौता कर वाद निस्तारित किया जा सकता है।
इस दौरान बार अध्यक्ष राजेंद्र राय और महामंत्री अरविंद तिवारी ने जिले के समस्याओं से उन्हें अवगत कराते हुए मधुबन में शुरू हुए ग्राम न्यायालय को बंद कराने और घोसी में सिविल जज जूनियर डिवीजन की कोर्ट की स्थापना के प्रस्ताव को निरस्त कराने मे सहयोग करने की मांग की। सिंह ने अधिवक्ताओं को चीफ जस्टिस से एक प्रति मंडल के माध्यम से मिलकर दोनों मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया। इस दौरान जितेंद्र पांडेय, हरिद्वार राय, रविशंकर सिंह,विरेंद्र प्रताप यादव,अरविंद सिंह आदि वक्ताओं ने मोटर वाहन की जो अदालत किराए के मकान में चल रही है, उसे वहां से हटाकर कलेक्ट्रेट या दीवानी परिसर में चलाए जाने की मांग के संबंध में एक पत्र सौंपा। इस मौके पर लालजी पांडेय,फतेह बहादुर सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, वीरेंद्र बहादुर पाल, जकितेंद्र कुमार पांडेय, झारखंडे मिश्रा, नरेंद्र नाथ राय, राकेश मिश्रा, वीरेंद्र सिंह , दिनेश सिंह, लक्ष्मीकांत व नरेंद्र नाथ राय आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे।