जिले में मौजूद सरकारी साधन समितियों पर खुले आम यूरिया की कालाबाजारी की जा रही। किसानों से तय मूल्य 299 के स्थान पर 310 से लेकर 350 रुपया प्रति बोरी यूरिया की बिक्री की जा रही है। किसानों के शिकायत करने के बाद भी स्थिति जस की तस है। प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है कि समितियों के साथ ही प्राइवेट दुकानों पर भी लूट मची है।
जिले में 92 न्यायपंचायतों में 92 साधन सहकारी समितियों की गोदामों सेेे उर्वरकों की बिक्री होती है। इसी प्रकार सभी ब्लाक मुख्यालयों पर राजकीय कृषि बीज भंडारों एग्रो और एफसीआई तथा कुछ अन्य सहाकरी संस्थाओं से उर्वरकों की ब्रिकी का प्रावधान है। जिले में 112 निजी लाइसेंसी उर्वरक विक्रेता हैं। जिले में साधन सहकारी समितियों का रबी सीजन में यूरिया का लक्ष्य दस हजार मीट्रिक टन का है। लेकिन 6600 एमटी यूरिया आई है। किसान साधन सहकारी समितियों के मिलने वाले उर्वरकों की गुणवत्ता, वजन और कीमत आदि को लेकर काफी भरोसा करते हैं। लेकिन इस रबी सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता काफी प्रभावित हुई।
समितियों के सचिवों की लंबी हडताल के चलते बुवाई के सीजन में डाई की उपलब्धता समितियों पर नहीं हो सकी। इससे किसानों को अधिक कीमतों पर डाई खरीदनी पड़ी। बुवाई के समय भी किसान डाई के साथ यूरिया मिलाकर छिडकाव करते हैं। सिंचाई के समय तो यूरिया का ही छिडकाव किया जाता है। लेकिन किसानों की शिकायत है कि यूरिया इस समय कहीं भी नियत दर पर नहीं मिल रही है।
किसान नेता देवपक्राश राय और राकेश सिंह कहते हैं कि यूरिया की कालाबाजारी रोक पाने में प्रशासन पूरी तरह विफल हैं। एआर कोआपरेटिव विवेक कौशल कहते हैं कि ऊंची दरों पर यूरिया बेचने की शिकायत उन्हें नहीं मिली है लेकिन यदि कहीं भी अधिक कीमत पर यूरिया बेचे जाने की पुष्टि हुई तो संबंधित सचिव के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।