जिला महिला अस्पताल में बृहस्पतिवार की शाम घोसी कस्बा के आए एक युवक के नेतृत्व में 10 से ज्यादा लोगों ने अस्पताल में हंगामा काटा। इनका आरोप था युवक की गर्भवती पत्नी के डिलेवरी कराने के लिए कोई डाक्टर नहीं आया।
ऐसे में एक महिला स्वास्थ्यकर्मी ने उसकी पत्नी का प्रसव कराया, लेकिन लापरवाही बरतने से उसकी हालात गंभीर होने पर उसे रेफर कर दिया गया।जहां उसकी पत्नी की मौत हो गई। उधर अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि महिला मरीज की मौत निजी अस्पताल में हुई, वह शिकायत को संज्ञान में लेकर जांच भी कर रहे है।
विरोध जताने वाले घोसी कोतवाली क्षेत्र के शोधनपुर निवासी अंशू पटवा ने बताया कि उसकी पत्नी ज्योती को प्रसव पीड़ा होने पर बीते 23 फरवरी की शाम बेहतर अस्पताल जानकर उसे महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप लगाया कि काफी इंतजार करने के बाद कोई चिकित्सक के न आने पर उसकी पत्नी की डिलेवरी अस्पताल की एक नर्स ने कराया।
नर्स का दावा था कि यह सामान्य डिलेवरी है ऐसे में वह करा सकती है। प्रसव कराने के बाद उसकी पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन एक घंटे बाद ही उसे लगातार ब्लीडिंग होने लगी। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे रेफर कर दिया। जिसके बाद वह अपनी पत्नी को निजी अस्पताल लाकर भर्ती कराया, जहां देर रात उसकी मौत हो गई।
बताया कि पत्नी का अंतिम संस्कार करने के बाद वह इस लापरवाही को जानने को लेकर महिला अस्पताल अपने परिजनों के साथ पहुंचा था। आरोप लगाया कि जब उसकी पत्नी की तबियत लगातार खराब हो रही थी तो उसके द्वारा कई बार चिकित्सक को बुलाने की मांग की गई लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
बताया कि उसकी शादी एक साल पहले ही हुई थी, अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही ने उसकी पूरी जिंदगी को बर्बाद कर दिया। वहीं इस मामले में सीएमएस जयशंकर प्रसाद का कहना है कि मामला संज्ञान में है, बीते 23 फरवरी को शाम 6 बजकर 29 मिनट पर सामान्य डिलेवरी कराई गई थी, लेकिन ब्लीडिंग होने पर उसे बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया था।