मऊ में गरमाई सियासत
इस प्रकरण को सदन में उठाने पर रेल मंत्री, रेल राज्य मंत्री तथा तमाम भाजपा के सांसदों की मौजूदगी के बावजूद सब ने समस्या को ध्यानपूर्वक सुना लेकिन किसी ने किसी भी तरह की नकारात्मक टिप्पणी नहीं की। अब 8 महीने पुराने निरीक्षण का रियलिटी चेक करने का होश 8 महीने बाद अरविंद राजभर को आया है।
घोसी सांसद ने आगे कहा जिस व्यक्ति को इतना भी ज्ञान ना हो कि मुद्दा कितने महीने पुराना है, उस व्यक्ति से जनता और क्या अपेक्षा करेगी। घोसी सांसद ने कहा 8 महीने पहले मेरे किए गए निरीक्षण तथा उसको रेल मंत्री के संज्ञान में लाने का ही नतीजा है, जो तत्कालीन शिकायतों में अब संभावित कुछ सुधार देखने को मिल रहा है।
घोसी सांसद ने अरविंद राजभर को अनाधिकृत निरीक्षण करने का अधिकार देने वाले रेलवे के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर भी कठोर कार्यवाही की बात कही।सांसद ने कहा जो व्यक्ति सदन में दिए हुए मेरे भाषण को समझ भी ना पाए उसको क्या ही कहा जाए।
वह बिना किसी संवैधानिक पद पर रहे रेलवे स्टेशन का अनाधिकृत निरीक्षण कैसे करने दिया गया? उनके साथ 50 से 100 लोगों का बिना रेलवे टिकट लिए रेलवे प्लेटफार्म पर घूमने के दौरान किसी ट्रेन के आ जाने पर यदि भगदड़ की स्थिति होती और कोई जान माल की क्षति होती तो उसका जिम्मेदार कौन होता? अरविंद राजभर द्वारा मऊ रेलवे स्टेशन को तथा वहां की गंभीर समस्याओं को मात्र स्टंट बाजी का जरिया बनाना राजीव राय ने बेहद अफसोस जनक और शर्मनाक बताया।