राजकीय महिला चिकित्सालय की अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने से गर्भवती की जांच प्रभावित हो रही है। पिछले चार दिनों से मरीज आ रहे और मशीन खराब होने के चलते लौट जा रहे हैं। तीमारदारों को कर्मचारी रटा रटाया जवाब देकर चलता कर दे रहे। नतीजतन उन्हें निजी जांच सेंटरों का रुख करते हुए अपनी जेबें ढीली करनी पड़ रहीं। उधर, शिकायत के बाद भी विभागीय अधिकारी लापरवाह बने हैं। मंगलवार को ही सुबह अल्ट्रासाउंड कराने पहुंची महिलाओं ने हंगामा किया।
बाल निकेतन तिराहा स्थित महिला जिला अस्पताल में जनपद के कोने-कोने से मरीजों की भीड़ प्रतिदिन पहुंचती है। 150 से 200 महिलाएं इलाज कराने आती हैं, जिसमें अधिकांश गर्भवती ही रहती हैं। इसके अलावा पेट व अन्य समस्याओं के सामने आने पर ओपीडी में चिकित्सक मरीजों को अल्ट्रा साउंड लिखते हैं। पिछले चार दिन पूर्व अल्ट्रा साउंड मशीन में खराबी आ गई। जिससे रिपोर्ट नहीं निकल पा रही।
मंगलवार को पांचवे दिन भी सुबह 8 बजे से घोसी, कोपागंज, मुहम्मदाबाद गोहना और मधुबन तहसील के दूर दराज गांवों से आई 50 से ज्यादा महिलाओं ने अल्ट्रासाउंड नहीं होने पर हंगामा किया। वहीं बीते पांच दिनों से अल्ट्रासांउड मशीन के खराब होने से आए दिन मरीजों के हंगामा को देखते हुए रेेडियालाजिस्ट डॉ. गौतम द्वारा मशीन के खराब होने की जानकारी चस्पा कर दिया। लेकिन सुबह सर्द मौसम में पहुंच रहे कुछ मरीज जांच न होने पर हंगामा कर रहे है।
ऐसे में मरीजों को प्राइवेट में अल्ट्रासाउंड कराना मजबूरी हो गई है। स्थिति यह है कि ओपीडी में बाहर ही बिचौलिया घूमते रहते हैं और जैसे ही मरीजों की पर्ची पर अल्ट्रासाउंड देखते हैं अपने चहेते अल्ट्रासाउंड केंद्र लेकर पहुंच जाते हैं। अल्ट्रासाउंड केंद्र उन्हें इसके एवज में अच्छा कमीशन मिल रहा। सर्वाधिक परेशानी गरीब महिलाओं को उठानी पड़ रही है।