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उलटि पलटि लंका सब जारी

Thu, 28 Sep 2017 11:25 PM IST
mau news
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अशोक वाटिका में होता सीता-हनुमान संवाद।
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मऊ। नगर क्षेत्र में श्री रामलीला मेला समिति की तरफ से मंचित रामलीला में नौंवा दिन का सजीव मंचन दशई पोखरा और शीतला माता मंदिर के बीच किया गया। इस दौरान हनुमान जी माता सीता का पता लगाने के बाद अशोक वाटिका को तहसनहस कर देते हैं। साथ ही रावण के पुत्र अक्षय कुमार को मार डालते है।
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  इस दौरान सुग्रीव की मित्रता के बाद प्रभु ने सुग्रीव को बालि से युद्घ करने के लिए कहा। ताकि वो बालि का वध कर सके। बालि और सुग्रीव के एक समान होने पर प्रभु दोनों में भेद नहीं कर पाते है। दूसरी तरफ युद्घ करते करते सुग्रीव की हालत खराब हो जाती है। इस दौरान वो वहां से अपनी जान बचाकर भाग जाते है। साथ प्रभु पर नाराज होते है। इस दौरान प्रभु ने दुबारा सुग्रीव को माला पहनाकर बालि से युद्घ के लिए भेजा। ताकि वो युद्घ के दौरान दोनों में भेद कर सकें। इस दौरान प्रभु श्री राम बालि का वध किया। इसके बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक किया गया। राजा बनने के बाद सुग्रीव की सेना माता सीता की खोज में निकली। इस दौरान हनुुमान जी लंका की तरफ गए। जहां रास्ते में अनेक बाधाएं आई। लेकिन सबका उन्होंने निवारण किया। इस दौरान समुद्र में मिली सुरसा को हनुमान ने अपनी बुद्घि से वश में कर लिया, साथ ही सुरसा से आशीर्वाद प्राप्त किए। लंका पहुंचने पर उनका सामना लंकिनी से हुआ। लंकिनी ने जब हनुमान जी को राकने का प्रयास किया तो उन्होंने अपनी प्रहार से मौत के घाट उतार दिया। इस दौरान लंकिनी ने कहा कि लग रहा अब रावण का अंतिम समय आ चुका है। क्योंकि जिस समय उसकी नियुक्ति की गई, तब उसे कहा गया था, जब कभी वानर के मारने से तुम्हारा अंत हो तो समझ लेना उस दिन लंका का अंतिम समय आ गया है। इस दौरान हनुमान अशोक वाटिका पहुंच माता सीता से मिलते है। हनुमान की माता सीता के सामने प्रभु श्री राम के द्वारा दी गई मुदरी गिराते है। अंगूठी को माता सीता पहचान जाती है। इस पर हनुमान उनके सामने लघु रूप में अवतरित होते है।
बोले माता मैं प्रभु श्री राम भक्त हनुमान हूं। साथ ही सारी कथा माता सीता को बताए। हनुमान जी माता सीता से अनुमति लेकर अशोक वाटिका में पहुंचकर फल कम खाए अशोक वाटिका को ज्यादा तहस नहस किए। रोकने के आए लंका के योद्घाओं को हनुुमान जी ने मार गिराया। इस दौरान इसकी सूचना रावण को दी गई। बंदर के द्वारा उत्पात मचाने की सूचना मिलने पर रावण ने अपने पुत्र अक्षय कुमार को भेजा। इस दौरान हनुमान ने उसे मार गिराया। अक्षय कुमार के मारे जाने की सूचना से बौखलाया रावण मेघनाथ को भेजा। हनुमान जी ने मेघनाथ को एक मुक्का ऐसा मारा कि वह मुर्छित होने की दशा में पहुंच गया। तब मेघनाथ ने हनुमान जी पर ब्रह्मास्त्र चलाया। ब्रह्मास्त्र का मान रखने के लिए हनुमान जी मेघनाद के बंधक बन गए। रावण ने दरबार में पहुंचे हनुुुमान जी को मार डालने का आदेश दिया, लेकिन तभी किसी ने बताया कि दूत को मारा नहीं जाता, ऐसा करते है हनुमान की पूंछ में आग लगा देते हैं, पूंछ जलने के बाद इस बंदर का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। रावण की सहमति मिलने पर सेवक दास और अन्य योद्घ हनुमान की पूंछ में घी और तेल में बोरे पट्ट बांधने लगें। इस दौरान हनुमान जी ने अपनी पूंछ को इतना लंबा कर दिया कि पूरे लंका का घी और तेल उनकी पूंछ में लग गया। इसके बाद जैसे ही पूंछ में आग लगाई गई, हनुमान जी बंधन मुक्त होकर पूरी लंका को उलट पलट कर जला डालते है। इस दौरान दर्शक दीर्घा में मौजूद दर्शकों ने जयश्री राम के जोरदार नारें लगाए। इससे पूरा  क्षेत्र जयश्रीराम के नारे से गूंजायमान हो गया। 
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