मऊ। नवरात्र की अष्टमी को दुर्गा मंदिरों में मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की आराधना की गई। नगर सहित जिले के प्रमुख देवी मंदिरों में तड़के से ही मां का पूजन अर्चन करने के लिए श्रद्घालुओं की भारी भीड़ लगी रही। पूरे दिन मंदिरों में गहमागहमी के बीच मां का जयकारा गूंजता रहा। इस बीच भक्तों ने उपवास रखकर विधि विधान से पूजन अर्चन किया। मंदिर परिसर माता दी के जयकारे से गूंजायमान होता रहा।
नवरात्र की अष्टमी के दिन पूजी जाने वाली देवी महागौरी के बारे मेें माना जाता है कि कभी भगवान शंकर ने देवी काली पर गंगा जल छिड़का था तो महागौरी के रूप में अवतरित हो गई थीं। जिन्हें सृष्टि का आधार भी कहा जाता है। वे अक्षय सुहाग की प्रतीक देवी भी हैं। उनकी पूजा विवाहित महिलाओं को फल प्रदान करती है। इन्हीं मान्यताओं को देखते हुए नगर के शीतला माता मंदिर, आजमगढ़ मोड़ स्थित मां सिद्घेश्वरी मंदिर, वनदेवी धाम, निधियांव गांव का अष्टभुजी मंदिर, मांदी सिपाह स्थित मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों मेें मां का पूजन अर्चन करनेे के लिए दूर दराज सहित गैर जनपद से आए श्रद्घालुओं का रेला टूट पड़ा। मां का दर्शन पूजन करने को भक्त बेताब नजर आ रहेे थे। माता रानी के आठवें स्वरुप का स्मरण करते हुए श्रद्घालु शांत भाव से कतार में खड़े होकर अपने बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे। बीच-बीच में जयकारे से मंदिर परिसर गूंजायमान हो जा रहा था। उन्होंने नारियल, चुनरी के साथ महागौरी का पूजन अर्चन किया। उधर नौ दिन तक व्रत रखने वाले भक्तों ने भी घर पर विधि विधान से मां दुर्गा के आठवें अवतार की पूजा की।