अस्पतालों पर चिकित्सकों की तैनाती तो की गई है, लेकिन अधिकांश लापता हैं। हालांकि अधिकारियों के मिलीभगत से वेतन जरूर ले रहे। रही बात शिकायत की तो सब जानते हुए भी वह मौन हैं और सीएचसी फतहपुर मंडाव दो चिकित्सकों के भरोसे चल रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बने पांच वर्ष हो गए लेकिन, बुनियादी सुविधाएं नहीं मिली। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों का तो अभाव है ही एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था तक नहीं है। जो विशेषज्ञ चिकित्सक हैं वह सप्ताह में दो दिन कुछ घंटे बिताकर घर का रास्ता नाप ले रहे। यहां अधीक्षक सहित आठ चिकित्सकों की नियुक्ति है, लेकिन बुधवार को दो चिकित्सक के भरोसे अस्पताल का संचालन हो रहा था।
इमरजेंसी में चिकित्सक नदारद रहे। अधीक्षक का कक्ष खुला तो था, लेकिन उनके नदारद रहने से लोग शिकायत नहीं कर सके। अस्पताल में जनरेटर की सुविधा के बाद भी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। बुधवार को पेटदर्द से परेशान महिला मरीज के आते ही अस्पताल में हड़कंप मच गया। अस्पताल में सुविधा न होने से महिला को वार्ड के अंदर बेड के बजाय चबूतरे पर लिटाकर इलाज की प्रक्रिया शुरू की गई।
यही हाल नेमडाड़, दुबारी, तिघरा नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है। अस्पताल के अधीक्षक डा. भैरव पांडेय ने बताया कि जनरेटर के लिए तेल की व्यवस्था नहीं है। सीमित संसाधनों से बेहतर सुविधा देने का प्रयास जारी है।