मऊ। विजयदशमी पर मऊ जिला मुख्यालय पर होने वाली रामलीला और दुर्गापूजा का आना अलग महत्व है, क्योंकि सारी विधि विधान और मंचन परंपरागत होता है। इसके चलते इस बार रामलीला का मंचन और दुर्गापूूजा पंडाल की स्थापना न होने से परंपरा ही नहीं टूटेगी, बल्कि व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित होगा। बात करने पर यह बातें सामनेें आई है।
कोरोना संक्रमण को लेकर शासन से जारी गाइड लाइन को देखते हुए इस बार दुर्गापूजा महा समिति और श्रीरामलीला मेला समिति मऊनाथ भंजन ने दुर्गा पंडाल रखने और रामलीला न कराने का निर्णय लिया। यहां की रामलीला मंच की बजाय अलग अलग स्थानों पर होती है। ऐसे में इस आर्कषक संजीव मंचन को देखने के लिए लोग ललाईत रहते है। बात करने पर लोगों ने अपनी राय दी।
नगर के आर्य समाज के सामने फोटो स्टूडियों का कार्य करने वाले आर्येंद्र वर्मा ने बात करने पर स्पष्ट कहाकि विजयदशमी के अवसर पर होने वाली रामलीला और दुर्गापूजा मऊ की पहचान है। क्योंकि कार्यक्रम के जरिए आपसी सौहार्य की झलक देखने को मिलती है। ऐसे में इस बार परंपरा तो टूटेगी साथ ही व्यापारियों को अच्छा खासा नुकसान होगा। नगर के बाल निकेतन पर लस्सी की दुकान चलाने निजामुद्दीनपुरा मुहल्ला निवासी प्रकाश ने कहा कि मेरे होश में यह पहला मौका है जब रामलीला नहीं होगी साथ ही शहर में दुर्गा पूजा पंडाल नहीं सजाएं जाएंगे। हम व्यापारियों का तो काफी नुकसान होगा। वैसे भी अभी कोरोना में व्यापार पूरी तरह से टूट चुका है जब त्यौहार में भी दुकानदार टूट जाएंगे।
नगर के बालनिकेतन पर कोल्ड ड्रिंक्स, लस्सी और नमकीन की दुकान करने वाले गौरव ने कहा कि हमारी दुकानदारी त्यौहार में सबसे ज्यादा होती है, क्योंकि दुर्गा पूजा और रामलीला में ज्यादा भीड़ बाहर से आती है। ऐसे में दुकानदार पूजा पंडाल न लगने और रामलीला न होने से काफी निराश है। चाट और गोलगप्पे की दुकान लगाने वाले संजय का कहना है कि त्यौहारों के मौसम में कई दिनों की कमाई एक दिन में ही हो जाती है क्योंकि पूरी रात लोग जगराता कर मां के पंडालों पर जाकर पूजन और दर्शन करते हैं ऐसे में कोरोना काल में दुर्गा पंडाल न सजने से काफी दिक्कतों का सामना हम लोगों को करना पड़ेगा।
पान की दुकान चलाने वाले राजकुमार ने कहा कि सादियों से चली आ रही परंपरा इस वर्ष टूटने के कगार पर है ऐसे में अगर ऐसा हुआ तो छोटे-छोटे दुकानदारों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। जिसकी भरपाई काफी दिनों में होगी। नगर के संस्कृत पाठशाला पर कास्मेटिक की दुकान चलाने वाले राजेश जैन का कहना है कि दुर्गा पूजा में काफी अच्छी बिक्री होती है। वहीं रामलीला से लोगों की काफी भावना जुड़ी है। ऐसे में दोनों का न होने काफी कष्टदायी है।