ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की मनमानी, बढ़ती महंगाई और प्रशासनिक उत्पीड़न से आक्रोशित व्यापारियों ने सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अलाउद्दीनपुरा स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक में व्यापारियों ने ऑनलाइन व्यापार की नीतियों का विरोध किया और राहत देने की मांग उठाई।
बैठक को संबोधित करते हुए व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष उमाशंकर ओमर ने कहा, ‘देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाने वाला पारंपरिक व्यापारी वर्ग आज इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है।
एक तरफ ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े मॉल्स ने स्थानीय बाजारों की रौनक छीन ली है, वहीं दूसरी तरफ जीएसटी व खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के नाम पर उत्पीड़न किया जा रहा है। व्या
पारी देश को सबसे ज्यादा टैक्स देता है और रोजगार पैदा करता है, लेकिन आज वही प्रशासनिक उत्पीड़न और कॉरपोरेट कंपनियों की चक्की में पिस रहा है।’
प्रदेश महामंत्री (आईटी मंच) आनंद ओमर ने कहा कि ई-कॉमर्स कंपनियों की ‘डीप डिस्काउंटिंग’ (अत्यधिक छूट) और ‘प्रेडेटरी प्राइसिंग’ के कारण ग्राहक पारंपरिक रिटेल दुकानों से दूर हो रहे हैं, जिससे छोटे दुकानदारों की बिक्री में 40 से 60 प्रतिशत तक गिरावट आई है।
दुकान का किराया, बिजली बिल और कर्मचारियों के वेतन का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दी जाने वाली अनुचित छूट पर रोक लगाने के लिए पारदर्शी नीति बनाई जाए।
वहीं, जीएसटी और स्थानीय प्रशासन की चेकिंग के नाम पर होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए विशेष सेल बनाया जाए। जीएसटी रिटर्न की जटिलताएं खत्म हों तथा पेनाल्टी और जुर्माने के नियमों में ढील दी जाए।
जिला महामंत्री गिरजा शंकर मौर्य ने मांग की कि व्यापारियों को आसान शर्तों पर ऋण, स्वास्थ्य बीमा और पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। साथ ही ‘व्यापारी कल्याण बोर्ड’ को और अधिक सशक्त बनाया जाए।
व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो व्यापारी समाज भुखमरी और बेरोजगारी से बचने के लिए देशव्यापी आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
बैठक में मुख्य रूप से राम नारायण साहू, शिवकुमार जायसवाल, जगदीश गुप्ता, अभय सिंह और सफीक डायमंड सहित कई वरिष्ठ व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।