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तीन हजार अतिकुपोषित, फिर दस बेड का पोषण पुर्नवास केंद्र दो सप्ताह से खाली

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जिले में अतिकुपोषित बच्चों को पोषित करने के लिए खोले गए पोषण पुनर्वास केंद्र बीते कई दिनों से खाली पड़ा है।दस बेड वाले पोषण पुर्नवास केंद्र में बीते 56 दिन में यहां केवल एक ही अतिकुपोषित बच्चे को भर्ती कराया जा सका है।यह स्थिति उस समय है जब जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या तीन हजार से अधिक है।इन कुपोषित बच्चों को इस केंद्र पर पहुंचाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की लंबीचौड़ी टीमों को है, लेकिन इन टीमों द्वारा कागजों पर ही कुपोषण दूर करने की कवायद की जा रही है।
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों पर गौर करे तो चार तहसील और नौ ब्लाकों वाले इस जिले में वर्तमान में तीन हजार से अधिक अतिकुपोषित यानी लाल श्रेणी के बच्चें है। जबकि 22 हजार 436 बच्चें कुपोषित है। लेकिन दो माह करीब यानी जनवरी से शनिवार तक यहां केवल एक ही अतिकुपोषित बच्चा को भर्ती कराया जा सका है। वो भी घोसी के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा भर्ती कराया गया। यह स्थिति उस समय है जब जिले में कुपोषण दूर करने के लिए 2587 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की बड़ी टीम के साथ स्वास्थ्य विभाग की नौ ब्लाकों की आरबीएसके टीमें कुपोषण दूर करने में लगी है। इसके बाद भी जिला में कुपोषण दूर करने के लिए बना दस बेड का पुर्नवास केंद्र कई दिनों से खाली चल रहा है।ऐसे तो दोनों विभागों को हर माह 20 अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कराना होता है। लेकिन कोरोना संक्रमण का ग्राफ लगातार कम होने के बाद भी अतिकुपोषित बच्चों को इन केंद्र पर पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे है।
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