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Mau News: सात महीने में तीन जीवित और दो नवजात मृत मिले, इनके पीछे कहीं अवैध अस्पतालों का हाथ तो नहीं?

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लिंग अनुपात बराबर बना रहे, इसको लेकर कागजों पर ही कड़ाई है। स्टिंग ऑपरेशन के बाद पांच अस्पतालों में खुलेआम गर्भपात के मामले उजागर होने के बाद भी जिम्मेदार लीपापोती में जुटे हैं। जिले में सात महीने में तीन जीवित और दो मृत नवजात के शव मिले हैं। ये सभी नवजात लावारिश थे।
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प्रसव के बाद चोरी-छिपे इन बच्चों को खुले में फेंक दिया गया था। सात महीने पहले मुहम्मदाबाद गोहना थाना क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के पास एक नवजात शिशु मिला था।
ट्रैक पर फेंके जाने से इस नवजात के सिर में गंभीर चोट लगी थी, जिसका उपचार जिला महिला अस्पताल में किया गया था। यह बच्चा प्रसव के कुछ घंटों बाद फेंका गया था।
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इसी तरह 25 मार्च 2026 को कोपागंज थाना क्षेत्र के हिलसा कोड़रा गांव के प्राथमिक विद्यालय के पास मंगलवार की सुबह गड्ढे में नवजात बालक का शव दबा मिला।
प्रधान की सूचना पर पहुंची पुलिस ने गड्ढा खोदकर शव निकाला और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया था। प्राथमिक विद्यालय के पास सुनसान स्थान पर किसी ने गड्ढा खोदकर शव दफना दिया था और कपड़ा वहीं छोड़ दिया था।
शव पूरी तरह न दबने और कपड़े के कारण आसपास कुत्तों की संख्या अधिक हो गई थी। यह देख वहां से गुजर रहे ग्रामीणों ने प्रधान पति को सूचना दी थी।
वहीं, 18 सितंबर 2020 को कोपागंज थाना क्षेत्र में मौजूद निजी अस्पताल में शुक्रवार की सुबह डिलीवरी के दौरान नवजात की मौत होने पर परिवार के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया था। साथ ही अस्पताल संचालक पर नवजात के शव को नदी में फेंकने और बिना सूचना के ही प्रसूता का ऑपरेशन करने का आरोप लगाया था। संवाद

लावारिस मिले हैं तीन नवजात
प्रोबेशन विभाग के अंतर्गत आने वाले चाइल्ड लाइन के प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि दिसंबर 2025 से अब तक तीन जीवित नवजात मिले हैं। उन्होंने बताया कि इसमें एक नवजात मुहम्मदाबाद गोहना में रेलवे ट्रैक पर, दूसरा रानीपुर में खेत में तथा तीसरा रामपुर थाना क्षेत्र में 2 अप्रैल को खेत में मिला था। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केवल जीवित नवजातों का है, जबकि असुरक्षित प्रसव के कारण नवजातों की मृत्यु का आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है। कई मामले सामने ही नहीं आ पाते, खासकर जब शवों को दफना दिया जाता है। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान एक संचालक ने यह भी बताया था कि प्रसव के बाद यदि नवजात की मृत्यु हो जाती है, तो उसके शव को बेहद गोपनीय तरीके से दफना दिया जाता है।

स्वेटर पहनाकर खेत में फेंका था नवजात शिशु को
10 फरवरी 2019 को चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के चिरैयाकोट कस्बे के जल निगम टंकी के पास, दोसपुर डीह बाबा के चबूतरे के समीप गेहूं के खेत में दोपहर लगभग एक बजे एक नवजात शिशु लावारिश हाल में पड़ा मिला था। प्रसव के बाद उसे ठंड से बचाने के लिए फेंकने से पहले स्वेटर पहनाया गया था। इस घटना की जानकारी उस समय हुई जब कस्बे के महतवाना मोहल्ले के निवासी धर्मेंद्र पासवान बगल के सरसों के खेत में कटाई कर रहा था। उसकी नजर नवजात शिशु पर पड़ी। शिशु के दोनों तरफ कुत्तों के बच्चे बैठे हुए थे। युवक ने चारों ओर देखा, लेकिन आसपास कोई दिखाई नहीं दिया। कई लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन बच्चे की पहचान नहीं हो सकी। सूचना पर पुलिस भी पहुंची थी। उसे चाइल्ड लाइन को सौंप दिया गया था।
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