फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीएसटी से पूर्वांचल की 150 चौखट यूनिटों के बंद होने का खतरा

Thu, 20 Jul 2017 01:04 AM IST
mau news
विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ। सीमेंट कंक्रीट से बनने वाले प्रोडक्ट  पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगा दिए जाने से  लघु उद्यमियों में निराशा का माहौल है। टैक्स रेट अधिक बढ़ जाने से प्रोडक्ट महंगा होने से समस्याएं बढ़ती ही जा रही है।  केंद्र सरकार की नई पालिसी से मऊ जनपद सहित पूर्वांचल की 150 यूनिटों के बंद होने का खतरा बढ़ गया है।लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष ने केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर सीमेंट कंक्रीट से बनने वाले प्रोडक्ट पर लगाए गए जीएसटी को हटाए जाने की गुहार लगाई है।       
विज्ञापन

सीमेंट कंक्रीट से चौखट, डेस्क बेंच, चौकी, दरवाजा आदि बनाने की मऊ जनपद में 50 सहित पूर्वांचल में 150 से अधिक यूनिटें हैं। महंगाई के इस युग में गरीबों के लिए सस्ता मकान का सपना मुश्किल हो रहा है। इमारती लकड़ी की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन इमारती लकड़ी मांग के अनुरूप नहीं मिल पा रही है। ऐसे में सीमेंट कंक्रीट से बने चौकी, दरवाजा, डेस्क बेच आदि प्रोडक्ट को गरीब से लेकर सभी अपना रहे हैँ। इससे लाखों पेड़ों की कटाई बंद है। इससे जहां लोगों को मकान बनाना सस्ता पड़ रहा है। वहीं पर्यावरण की भी सुरक्षा हो रही है। अब केंद्र सरकार की तरफ से सीमेंट कंक्रीट से बनने वाले प्रोडक्ट पर 28 प्रतिशत जीएसटी लाद दिया गया है। पहले से दूना कर लगाए जाने से यूनिटों से निकलने वाला प्रोडक्ट उपभोक्ताओं को काफी महंगा पड़ रहा है। ऐसे में उद्यमियों के लिए तैयार प्रोडक्ट सेल करने में मुश्किलें आ रही है।
केंद्र सरकार की तरफ से 20 लाख से कम का कारोबार करने वालों को जीएसटी से मुक्त और 20लाख से 75 लाख तक के कारोबार करने वालों को दो प्रतिशत टैक्स का प्रावधान किया गया है। ऐसे में दो तरफा नीति से पूर्वांचल की 150 से अधिक यूनिटों के बंद होने का खतरा बढ़ गया है। इस संबंध में लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष भरत कुमार थरड का कहना है कि सीमेेंट कंक्रीट से बनने वाले प्रोडक्ट को जीएसटी से मुक्त किया जाए। वहीं लघु उद्योग भारती के सेक्रेटरी बालकृष्ण थरड का कहना है कि सीमेंट कंक्रीट से बनने वाले प्रोडक्ट पर भारी भरकम जीएसटी लाद दिए जाने से यूनिटों का संचालन मुश्किल हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार को लगाए गए कर पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठन के कोषाध्यक्ष आजाद यादव का कहना है कि केंद्र सरकार लघु उद्यमियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें