तटवर्ती इलाके में घाघरा नदी में आई बाढ़ में डूबी फसल।
दोहरीघाट / दुबारी। घाघरा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी होने के साथ ही मधुबन तहसील के मिश्रौली से कुवंरपुरवा के बीच मौजूद बंधे में शनिवार को तेज रिसाव होने लगा है। ऐस में नदी के जलस्तर बढ़ोत्तरी होने के साथ ही कुंवरपुरवा बंधे पर खतरा मंडराने लगा है। दोहरीघाट में घाघरा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी रहने से लोगों को नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है।। शनिवारको 24 घंटे में घाघरा के जलस्तर में पांच सेमी का बढाव दर्ज किया गया। दोहरीघाट में नदी खतरे के निशान से 55 सेमी ऊपर बह रही है। शवदाह घाट से लेकर खाकी बाबा की कुटी तक कटान का खतरा बढता जा रहा है। कस्बे के तीन मोहल्लों में बाढ़ के पानी के साथ आए कचरे को साफ न कराए जाने से लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं।
मधुबन तहसील के मिश्रौली से कुवंरपुरवा बंधा में कई स्थानों पर रिसाव शनिवार को तेज हो गया। इससे बंधे पर खतरा मंडराने लगा है। परसिया हाहानाला नदी का जलस्तर 66.25 मीटर रहा। जबकि खतरा निशान 66.31 है। नदी में जलस्तर बढ़ने का रफ्तार जारी रहा तो रविवार तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जा सकता है। नदी के जलस्तर में घटाव से लोग राहत की सांस ले रहे थे।अब जलस्तर बढने से लोगों को चिंता सताने लगी है। सभी पुरवों का संपर्क मार्ग जगह-जगह जल मग्न है। बाढ क्षेत्र में सभी फसल धान बजरी बजरा गन्ना आदि की हजारों हेक्टेयर फसल नष्ट हो गई है। मच्छरों का प्रकोप काफी अधिक बढ़ जाने से लोग मच्छरजनित बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। हैंडपंप प्रदूषित पानी उगल रहे हैं। उसका स्वाद ही बदल गया है।
हाहानाला रिंग बाध में मिश्रौली के पास रिसाव है और कुवंरपुरवा और गजियापूर के मामूली रिसाव तेज हो गया है । जबकि सबसे ज्यादा बंधा कमजोर हाहानाला रिंग बंधा में गजियापूर पुलिया के पास है। नदी में एक बार फिर बाढ़ आती है तो कभी भी अनहोनी हो सकती है । जूनियर इंजीनियर कमलेश यादव का कहना है बंधे पर 24 घंटा नजर रखी जा रही है। बंधे पर मरम्मत कार्य होता रहता है।
उधर दोहरीघाट में नदी का जलजलस्तर जैसे-जैसे बढ़ रहा है। लोगों को नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है। शनिवारको 24 घंटे में घाघरा के जलस्तर में पांच सेमी का बढाव दर्ज किया गया। नदी के रुख से नगर के ऐतिहासिक धरोहरे मुक्तिधाम, दुर्गामंदिर, खाकी बाबा की कुटी, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, डीह बाबा का मंदिर, हनुमान मंदिर अभी भी खतरे की जद में हैं। तटवर्ती इलाके की हजारों एकड फसल अभी भी पानी में डुबी हुई है। फसल नष्ट होने की चिंता किसानों को सताने लगी है। नगर के भगवानपुरा, मल्लाह टोला तथा दलित बस्ती में बाढ़ के पानी के साथ जमा गंदगी की सफाई न होने से मोहल्लेवासी विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो नदी का जल स्तर शनिवार को 70.45 मीटर रहा। जबकि शुक्रवार को 70.40 मीटर रहा।गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर है।