जिला अस्पताल में एमआरआई की जांच की सुविधा नहीं है। इससे मरीजों को परेशानी होती है। उन्हें अभी भी बाहर से एमआरआई की जांच करानी पड़ती है। बीते छह महीने में करीब 10,226 मरीज का सीटी स्कैन और 5490 मरीज का डायलिसिस कराई है।
एक रुपये पर्ची पर मिलने वाली सुविधा से औसतन हर मरीज का दो हजार रुपये बचा है। इस समय निजी सेंटर पर सिटी स्कैन कराने का दो से चार हजार शुल्क है, जबकि डायलिसिस कराने का चार्ज तीन से चार हजार रुपये है।
जानकारी के अभाव में लोग इससे वंचित भी हैं। जनपद के पीएचसी और सीएचसी पर आने वाले मरीज भी वहां से पर्ची कटाने के बाद चिकित्सक के रेफर करने के बाद भी जिला अस्पताल में जांच करा सकते है।
निजी सेंटर 1500 से दस हजार में होता है सीटी स्कैन
निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर जांच की लागत टेस्ट के प्रकार और सेंटर के आधार पर अलग-अलग होती है। सामान्य रक्त/यूरिन टेस्ट 500 रुपये से शुरू हैं, जबकि अल्ट्रासाउंड 600-1000, सीटी स्कैन 1500-10,000 रुपये तक लगता है। निजी सेंटर या अस्पतालों में डायलिसिस की लागत आमतौर पर प्रति सत्र 2,000 से 5,000 रुपये के बीच होती है, जो केंद्र की गुणवत्ता और शहर पर निर्भर करती है। मासिक खर्च औसतन 12,000 से 40,000 रुपये या अधिक तक जा सकता है, क्योंकि मरीजों को सप्ताह में 2-3 बार डायलिसिस की आवश्यकता हो सकती है।
जिला अस्पताल में एक रुपये सीटी स्कैन और डायलसिस हो रही है। बीते एक माह के दौरान सीटी स्कैन और डायलिसिस मिलाकर 15686 मरीजों का जांच किया गया है। एमआरआई की जांच के लिए जिला अस्पताल में अभी सुविधा नहीं है।
-डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल