राजस्थान एवं पंजाब के कुछ क्षेत्रों में टिड्डी के प्रकोप के बाद पूर्वांचल में टिड्डी के प्रकोप बढ़ने की संभावना प्रबल हो गई है। मउ में कृषि विभाग की तरफ से किसानों को जागरुक करने की कवायद शुरू कर दी गई है। साथ ही टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों एवं ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से जिला प्रशासन तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।
टिड्डी के प्रकोप के बाद पूर्वांचल में टिड्डी के प्रकोप बढ़ने की संभावना को लेकर जिला प्रशासन की तरफ से अलर्ट जारी कर दिया गया है।
कृषि विभाग की तरफ से कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को जागरुक करने की कवायद तेज कर दी गई है।जनपद में निरंतर टिड्डी दल के आक्रमण की निगरानी की जाए ताकि किसी भी स्तर के प्रकोप की दशा में टिड्डी दल पर नियंत्रण पाया जा सके। टिड्डी दल के प्रकोप की दशा में उसके नियंत्रण के लिए सुझाव एवं संस्तुतियां दी जा रही है कि टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों एवं ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से जिला प्रशासन तक पहुंचाएं। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि टिड्डी के प्रकोप की दशा में एक साथ एकत्र होकर टीन के डब्बों, थालियों आदि को बजाते हुए शोर मचाएं। शोर से टिड्डी दल आस-पास के खेतों में आक्रमण नहीं कर पाएंगें।
बलुई मिट्टी टिड्डी के प्रजनन एवं अण्डे देने हेतु सर्वाधिक अनुकूल होता है। इसलिए टिड्डी दल के आक्रमण सम्भावित ऐसे मिट्टी वाले क्षेत्रों में जुताई करवा दें। जल का भराव करा दें। ऐसी दशा में टिड्डी के विकास की संभावना कम हो जाती है। टिड्डी दल के न्यून मध्यम प्रकोप की दशा में किसान एक साथ मिलकर क्लोरोपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी अथवा लैंडासाइहेलोथ्रीन पांच प्रतिशत ईसी का तीब्र छिड़काव करें। टिड्डीदल के नियंत्रण के लिए रसायन मैलाथियान 95 प्रतिशत यूएलवी का छिड़काव अत्यन्त प्रभावी होता है परंतु इस रसायन की जन सामान्य की उपलब्धता न होने के कारण कृषक स्तर से इसका छिड़काव नहीं किया जा सकता है। यह रसायन टिड्डी नियंत्रण से संबंधित सरकारी तंत्र को ही उपलब्ध हो सकता है। इसलिए टिड्डी दल के आक्रमण की दशा में लोकस्ट कंट्रोल आर्गेनाइजेशन फरीदाबाद एवं क्षेत्रीय केन्द्रिय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र लखनऊ को फोन नं0 0522-2732063 पर सूचना दें। ताकि प्रशिक्षित व्यक्तियों एवं समुचित यन्त्रों के माध्यम से प्रभावशाली नियंत्रण कराया जा सकें।