जिला अस्पताल में शासन के समुचित उपचार के दावों की पोल पिछले 5 महीनों से खुल रही है। अत्याधुनिक उपचार के दौर में जिला अस्पताल में बीते 5 माह से रेडियोलॉजिस्ट के इस्तीफे के बाद नई तैनाती नहीं हुई है।
अभी सप्ताह में महज दो दिन आजमगढ़ के अतरौलिया से डॉ. हिमांशु जायसवाल आ रहे है। सितंबर 2025 में डॉ वीरेंद्र कुमार चौधरी के स्थिति पर के बाद अल्ट्रासाउंड कक्ष के दोनों कमरों में ताला बंद है। मेडिको लीगल के केस में मरीजों का फिल्म पर ही जांच हो रही है।
डॉ. हिमांशु जायसवाल के आने के बाद उसकी रिपोर्ट तैयार किया जाता है। जनपद की 26 लाख की आबादी की जांच करने के लिए जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट की तैनाती किया गया था। करीब पांच साल से रेडियोलाजिस्ट को लेकर कई बार जांच प्रभावित हो चुकी है।
पांच माह पहले डॉ. बीरेंद्र कुमार चौधरी के इस्तीफे के बाद से जांच होने के बाद भी मरीजों को रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है। इसका सीधा असर उपचार में देरी और मेडिको लीगल के मामलों में देरी से न्याय मिल रहा है।
रेडियोलॉजिस्ट एक विशेषज्ञ डॉक्टर होता है, जो एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और पीईटी स्कैन जैसी इमेजिंग तकनीकों के जरिए बीमारियों का निदान और उपचार करते हैं। ये शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच कर कैंसर, हड्डियों के टूटने, ट्यूमर और हृदय रोगों जैसी स्थितियों का पता लगाते हैं।
मेडिकोलीगल में भी रेडियोलॉजिस्ट की भूमिका
मेडिको लीगल की जांच में रेडियोलॉजिस्ट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो एक्स-रे, सीटी, और एमआरआई के माध्यम से चोट, मौत के कारण, और शरीर में बाहरी वस्तुओं की सटीक पहचान करते हैं। वे फॉरेंसिक रेडियोलॉजी से उम्र का निर्धारण, बाल शोषण, शव की पहचान में साक्ष्य प्रदान करते हैं, जो कानूनी कार्यवाही में निर्णायक साबित होते हैं।
रेडियोलाजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा गया है। अभी जिला अस्पताल में आजमगढ़ से आने वाले चिकित्सक सप्ताह में दो दिन तैयार फाइल की रिपोर्ट तैयार कर रहे है। - डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल