जिले के राजकीय पशु चिकित्सालयों में पशु चिकित्साधिकारियों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। एक पशु चिकित्साधिकारी को दो से तीन पशु चिकित्सालयों की जिम्मेदारी दी गई है, इसके चलते पशुपालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी चिकित्सक नहीं होने से पशुपालक झोलाछाप पशु चिकित्सकों से पशुओं का इलाज कराने को मजबूर हैं। इससे पशुओं की बीमारी पर अधिक खर्च करने के बावजूद बीमारी ठीक नहीं हो पाती है।
बीमार पशुओं को सही इलाज नहीं मिलने से अधिकांशतः पशुओं की मौत हो जाती है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। विभाग में 31 के सापेक्ष 14 पशु चिकित्साधिकारियों की ही तैनाती है।
47 के सापेक्ष 42 पशुधन प्रसार अधिकारियों की तैनाती है। पशुपालकों की शिकायत के बाद भी पशु चिकित्सालयों पर पशु चिकित्सकों की तैनाती नहीं की जा सकी है।
पशुपालन विभाग की तरफ से जिले में 2.14 लाख पशुओं का बेहतर तरीके से इलाज करने के लिए 31 राजकीय पशु चिकित्सालयों और 47 पशु सेवा केंद्रों की स्थापना की गई है।
प्रत्येक अस्पताल पर एक पशु चिकित्साधिकारी, एक फार्मासिस्ट और दो चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का पद सृजित किया गया है। पशु सेवा केंद्र पर एक पशुधन प्रसार अधिकारी की तैनाती है लेकिन लंबे समय से पशु चिकित्साधिकारियों और फार्मासिस्ट के पद रिक्त चल रहे हैं।
पशु चिकित्सकों के पद खाली होने से एक ओर जहां विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं, वहीं पशुपालकों को विभागीय योजनाओं का बेहतर लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। विभागीय स्तर से प्रत्येक माह रिमाइंडर तो भेजे जाते हैं, लेकिन अभी तक संबंधित पशु चिकित्सालयों में पशु चिकित्साधिकारियों की तैनाती नहीं हो सकी है।
आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जिले में 31 के सापेक्ष 14 पशु चिकित्साधिकारियों की तैनाती है। 31 के सापेक्ष सात फार्मासिस्ट हैं। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के 103 पद सृजित हैं, लेकिन 34 की ही तैनाती है। 47 के सापेक्ष 42 पशुधन प्रसार अधिकारियों की तैनाती है।
एक पशु चिकित्साधिकारी को कई पशु अस्पतालों की जिम्मेदारी मिलने के चलते पशुओं का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। बरसात के मौसम में पशु मुंहपका, खुरपका सहित विभिन्न संक्रामक बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं।
परेशान पशुपालकों को निजी पशु चिकित्सकों की शरण लेनी पड़ रही है। इस बाबत उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरबी चौरसिया का कहना है कि रिक्त चल रहे पशु चिकित्साधिकारियों और कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने के मामले में शासन को पत्र भेजा गया है।